हरिद्वार में ठाठ से अपने आश्रम से गंगा को निहारने वाले संतों के घाट मां गंगा को पसंद नहीं आए। गंगा ने संतो के घाट को छोड़ दिया है जिससे संतो के घाट जलविहीन हो गए हैं।
उत्तरी हरिद्वार के संतों के निजी घाट गंगा जी ने पूरी तरह छोड़ अपनी दिशा बदल दी है। अब इन घाटों पर बरसात में आए मलबे के ढेर लगे हुए हैं। जिसकी वजह से महिलाओं को कार्तिक मास में गंगा स्नान करने सर्वानंद घाट पर जाना पड़ रहा है।
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निजी घाट जलविहीन हो गए
गीता कुटीर तपोवन से भागीरथी बिंदु तक लगभग दो किलोमीटर में आश्रमों द्वारा नीलधारा में बनाए गए निजी घाट जलविहीन हो गए हैं। बरसात में गंगा में आई बाढ़ ने संतों के घाटों के सामने मलबे के चट्टे लगा दिए हैं।
भूपतवाला में गंगा की 10 नंबर ठोकर के जलसमाधि स्थल को भी गंगा ने छोड़ दिया है। प्रशासन जिस काम को कई सालों के प्रयास से नहीं कर पा रहा था, गंगा जी एक झटके में कर गई।
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गंगा को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से कुंभ मेला 2010 में भी प्रशासन संतों को जलसमाधि न देने से मनाने का प्रयास किया था। लेकिन इसके लिए कुछ माने कुछ नहीं माने। लेकिन अब गंगा ने खुद रास्ता बदलकर सभी को हैरान कर दिया है।
इन घाटों से रूठी गंगा जी
सप्तसरोवर स्थित गीता कुटीर तपोवन, सप्तऋषि आश्रम के गोस्वामी गणेश दत्त घाट, कच्छी आश्रम घाट, पूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद के परमार्थ आश्रम, भूमा निकेतन, चित्रकूट आश्रम, अग्रसेन आश्रम, जलसमाधि आदि घाटों से गंगा जी दूर चली गईं हैं।
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इनकी भी सुनिए
कार्तिक मास में क्षेत्र की महिलाएं प्रतिदिन सुबह गंगा स्नान कर उगते सूर्य को इन घाटों पर जल चढ़ा पूजा-अर्चना करती हैं। पूरे महीने घाटों पर महिलाओं का मेला लगा रहता था, लेकिन अब घाटों पर जल न होने से उन्हें दो किमी से भी अधिक दूरी तय कर भागीरथी बिंदु स्थित सर्वानंद घाट पर जाना पड़ रहा है। क्षेत्रीय लोगों के साथ मिलकर इस संबंध में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों से वार्ता की जाएगी।
अनिल मिश्रा, पार्षद नगर निगम।