रुड़की में एक ही परिवार में चौथी आत्महत्या ने शहर में सनसनी फैला दी है। पहले दो पत्नी, फिर सगा भाई और अब स्वयं आईआईटी प्रोफेसर ने आत्महत्या कर मौत को गले लगा लिया है।
हालांकि प्रोफेसर की मौत हो लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। लेकिन पुलिस प्रथम दृष्टया जांच में मामले को आत्महत्या का मान रही है।
पढें...कैसे हुई आईआईटी के प्रोफेसर की मौत?
आईआईटी रुड़की में थे प्रोफेसर
आईआईटी रुड़की में इलेक्ट्रोनिक्स एवं कंप्यूटर डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डा. अरुण कुमार पर दु:खों का ऐसा पहाड़ टूटा की वह भी उसी में दबकर रह गये। उनकी पत्नी उषा ने स्वयं को आग लगाकर मौत हो गले लगाया।
उस समय प्रोफेसर अरुण कुमार आईआईटी रुड़की के टीचर्स क्वार्टर में रहते थे। उन्होंने इस दु:ख उबरने के लिए काफी हिम्मत दिखाई। यही नहीं नये सिरे से जीवन की शुरूआत करने के लिए उन्होंने दूसरी शादी का फैसला लिया।
साधना नई शुरूआत लेकर आई
उनके जीवन में साधना एक नई शुरूआत लेकर आई। साधना आईआईटी रुड़की स्थित एसबीआई बैंक में सर्विस करती थी। एक बार तो लगा कि सब कुछ ठीक हो गया। लेकिन अचानक ही फिर समय ने करवट बदली और प्रोफेसर फिर से उसी मुकाम पर आ गये। जहां से उन्होंने नया जीवन दुबारा से शुरूआत की थी।
उनकी दूसरी पत्नी साधना ने भी आत्महत्या कर ली। इसके बाद वह टूट गये। लेकिन उन्होंने हिम्मत से काम लिया और पहले की ही तरह से छात्रों को पढ़ाने में व्यस्त होने लगे। लेकिन पांच माह पूर्व फिर से उन्हें जिंदगी ने एक और झटका दे दिया। इस बार उनके भाई टपकेश की संदिग्ध मौत हो गई।
एक कड़ी और जुड़ी
एक के बाद एक असहनीय दु:खों ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। परिवार के साथ जुड़ी आत्महत्याओं की श्रंखला में प्रोफेसर अरुण कुमार ने एक और कड़ी के रुप में खुद को जोड़ दिया।
हालांकि अभी यह बात पूरी तरह से पुष्ट नहीं हुई है कि अरुण कुमार ने आत्महत्या की है या उनकी हत्या हुई है। लेकिन पुलिस प्रथम दृष्टया इसे आत्महत्या मान रही है।
आत्महत्या पर नहीं है यकीन
आईआईटी प्रोफेसर डा. अरुण कुमार की मौत को भले ही पुलिस आत्महत्या मानकर चल रही हो। लेकिन उनके परिजन और स्टाफ के लोग इस बात को कतई मानने को तैयार नहीं है।
प्रोफेसर अरुण कुमार की बेटी ने मामला को हत्या का बताते हुए तहरीर दी है। उसका कहना है कि उसके पिता आत्महत्या नहीं कर सकते हैं। उसके पिता की गला रेतकर हत्या की गई है।
मंगलवार को पढ़ाया
इलेक्ट्रोनिक्स एवं कम्प्यूटर डिपार्टमेंट के जूनियर लैब असिस्टेंट अनिल कुमार ने बताया कि प्रोफेसर साहब मंगलवार को प्रतिदिन की तरह की लैब ली थी।
जिसमें 25 छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। वह पूरी तरह से सामान्य थे। उसी तरह से बात कर रहे थे। जैसे अन्य दिनों में करते थे। वह यह मानने के लिए तैयार नहीं कि प्रोफेसर साहब ने आत्महत्या की होगी।
हत्या या आत्महत्या
इसी से स्टाफ और अन्य प्रोफेसर भी आत्महत्या की बात पर यकीन करने को तैयार नहीं। मामला हत्या का है या फिर आत्महत्या पुलिस की पड़ताल में इसका सच सामने आ ही जाएगा।
पुलिस मामले को प्रथम दृष्टया इसे आत्महत्या मान जरूर रही है लेकिन पुलिस के पास इस बात को साबित करने के लिए फिलहाल कोई ठोस प्रमाण नहीं है।