चारधाम यात्रा पर देश, दुनिया भर से यहां पहुंचे तीर्थयात्रियों पर प्रकृति ने तो कहर बरपाया ही, राहत के नाम पर जुटे लोगों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। तीर्थयात्रियों से जिस तरह भेदभाव किया जा रहा है, वह शर्मसार कर देने वाला है।
राहत के बजाय तीर्थयात्रियों के आपदा के जख्म और हरे हो रहे हैं। आपदा की इस घड़ी में मिलकर राहत कार्य में जुटने के बजाय अपने-अपने प्रदेश के लोगों की मदद की जा रही है। दूसरे प्रदेश के प्रभावितों को उनके हाल पर छोड़ा जा रहा है।
बृहस्पतिवार दोपहर डेढ़ बजे चंडीगढ़ की अमरिंदर कौर, गुरमीत, अमनेंदर सिंह आईएसबीटी में लगे एक राहत शिविर में इस उम्मीद के साथ पहुंचते हैं कि उन्हें यहां मदद मिलेगी। शिविर में उन्हें न सिर्फ चाय, पानी के लिए पूछा जाएगा बल्कि वे बस से सकुशल अपने घर तक पहुंचा दिए जाएंगे।
लेकिन जिस राहत शिविर में वे पहुंचे वह पंजाब का नहीं राजस्थान का था। तीनों ने बताया कि वे आपदा प्रभावित हैं, उनके साथ दो अन्य लोग बीमार हैं। इतना कहते ही तीनों कुछ और बोलते, शिविर में मौजूद लोगों ने पूछा, कहां के रहने वाले हैं। चंडीगढ़ निवासी बताने पर उन्हें मदद से इनकार कर दिया गया।
राजस्थान के इस राहत शिविर में मौजूद भगवान सिंह, नवल, रमेश कुमार ने बताया कि 21 जून से आईएसबीटी में शिविर लगा है। अग्रवाल धर्मशाला में राजस्थान के यात्रियों के उपचार, रहने, खाने की सारी व्यवस्था है।
अग्रवाल धर्मशाला में यात्रियों को भोजन कराने के बाद इनको आईएसबीटी लाया जाता है और जयपुर या फिर इससे आगे जहां तक जाना है उन्हें बस से नि:शुल्क रूप से वहां तक पहुंचाया जा रहा है।