आपदा प्रभावित क्षेत्रों में शवों से महामारी या संक्रमण वाली बीमारियां फैलने का खतरा बेहद कम होता है। यूनिवर्सिटी आफ नार्थ टैक्सास के आपातकालीन प्रबंधन डा. कैलाश गुप्ता ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान कहा कि अगर मृतक पहले से किसी संक्रामक रोग से ग्रस्त हो, तभी इस तरह का खतरा रहता है।
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बुधवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य डा. मुज्जफर अहमद और विशेषज्ञ नगमा फिरदौस ने राज्य में आपदा के बाद चिकित्सा राहत कार्यों का जायजा लिया। डा. अहमद ने विभिन्न जनपदों में भेजे गए चिकित्सकों तथा आपदा के उपरांत संभावित संक्रमण के बारे में जानकारी ली।
शवों से महामारी अथवा संक्रमण उत्पन्न नहीं होती
इस दौरान अमेरिकी विवि के आपदा प्रबधंन विषेशज्ञ डा. कैलाश गुप्ता ने बताया कि शवों से किसी प्रकार की महामारी अथवा संक्रमण उत्पन्न नहीं होता। आपदा के बाद शवों का उचित ढंग से डिस्पोजल कर दिया जाना चाहिए। अगर शवों से निकलने वाला पानी किसी तरह नदी के पानी में मिल जाए तो इससे डायरिया का खतरा पैदा हो जाता है।
बैठक में अपर सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य पीयूष सिंह, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. योगेश शर्मा सहित अन्य विभागीय अफसर मौजूद रहे।
एनडीएमए भी देगा मदद
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने राज्य को स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग देने का प्रस्ताव किया है। इसके तहत एएनएम और आशा को कनेक्टिविटी के लिए टैब, हाईजिन किट, डिलीवरी किट, साबुन, डिटरजेंट तथा परिवार कल्याण के अन्य साधन देने की बात हुई है।
साथ ही छोटे आकार की मोबाइल मेडिकल वैन तथा ऊपर टेलीमेडिसन की व्यवस्था को सेटेलाइट संपर्क भी दिया जाएगा।