आधी रात का वक्त...सुनसान इलाका...आगे जंगल और तेजरफ्तार दौड़ती जीप। जीप में ड्राइवर और उसके साथ बैठा उसका एक साथी। घायल पति के साथ जीप से घर लौट रही रमनदीप कौर। घर करीब आया, जीप रोकने को कहा तो रफ्तार बढ़ने लगी। रमनदीप कौर के दिमाग में दिल्ली की दरिंदगी कौंध गई। अंजाम सोचा तो सिहर गईं। बिना एक लम्हा गंवाए जीप से छलांग लगा दी। पत्नी को छलांग लगाते देख अवाक पति भी बीमारी की परवाह न कर कूद गया। दोनों अपनी हड्डियां तुड़वा बैठे। कई दिनों तक पति-पत्नी सदमे में रहे।
अमर उजाला से 12 जनवरी की दास्तां बयां करतीं रमनदीप कौर कांप उठती हैं। पति दीपक रात करीब 11 बजे लालतप्पड़ (देहरादून) स्थित घर में गिर गए। ज्यादा चोट लगी। दर्द तेज था। रमनदीप उसे छह-सात किलोमीटर दूर डोईवाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले गईं। वहां तैनात डाक्टर उमा रावत ने इलाज किया।
डाक्टर ने रमनदीप को सलाह दी कि सुबह घर जाएं। लेकिन रमनदीप डेढ़ माह के बच्चे को घर पर छोड़ आई थी। ऐसे में घर लौटना जरूरी समझा। तब तक रात के करीब साढ़े 12 हो चुके थे। दोनों जब डोईवाला चौराहे पर आए तो वहां सन्नाटा था। वहां मौजूद एक पुलिस वाले ने दोनों से पूछताछ की। कुछ ही देर बाद एक जीप रोककर बैठा दिया।
चालक को हिदायत दी कि इनकी तबियत खराब है, जहां बताएं उतार देना। घर (लालतप्पड़) नजदीक आने पर दंपति ने जीप रोकने को कहा तो ड्राइवर ने उसकी रफ्तार बढ़ा दी। उसके बाद बारी-बारी से दंपति ने छलांग लगा दी। कुछ देर बेहोश रहे फिर राहगीरों की मदद से दोबारा अस्पताल पहुंचे।
सीट पीटता रहा पर सब बेअसर
रमनदीप के पति 27 वर्षीय दीपक ने बताया कि रुकवाने पर जीप नहीं रुकी तो उसने पैर और हाथ से ड्राइवर की सीट को पीटना शुरू किया। फिर भी नहीं रुकी तभी अचानक मेरी पत्नी चलती गाड़ी से कूद गई। उसके कूदते ही मैंने भी छलांग लगा दी। मेरे कान का परदा फट गया है। हाथ की हड्डी टूट गई। पैर में भी काफी चोट आई है।
पुलिस बोली-कूदी क्यों, तुम्हें खा थोड़े जाते
उस रात के बाद खौफ के चलते रमनदीप कौर ठीक से सो नहीं पाई है। बताती है, उसे दिल्ली की दरिंदगी का ही खयाल आ रहा था। पता ही नहीं चला कि वह कब गाड़ी से कूद पड़ी। उनकी कुहनी और पैर की हड्डियां टूट गईं। घटना के बाद पड़ोसियों द्वारा दी गई जानकारी के बाद जब पुलिस घर आई तो उल्टे उन्हें ही डांटने लगी कि गाड़ी से क्यों कूदी। कोई तुम्हें खा थोड़े जाता। हालांकि, रमनदीप पूछती हैं कि आगे जंगल क्षेत्र में जाकर उनके साथ कोई घटना घटती तो उनकी आवाज कौन सुनता।
लालतप्पड़ के चौकी प्रभारी मुकेश नौटियाल का कहना है कि वह उस घटना के बाद जांच करने उनके घर गए थे। उन दोनों ने सिर्फ आशंका को देखते छलांग लगाई। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। आगे यदि कुछ होता तो शोर मचाते या फिर मोबाइल से आगे की चौकी को फोन कर लेते। वैसे भी इस घटना के बारे में कोई तहरीर नहीं दी गई है, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की गई।