हाईकमान की सख्ती के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर पिछले तीन दिनों से मची खींचतान रविवार को फिलहाल थम गई। शुक्रवार को इस पद के लिए नामांकन दाखिल करने वाले दोनों खेमों के प्रत्याशियों त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत ने नाम वापस ले लिए।
हालांकि यह खींचतान का ही असर था कि नाम वापसी का समय (दोपहर 12 बजे) बीतने के लगभग छह घंटे बाद पर्चे वापस हुए। बाद में दोनों ने हाईकमान के निर्णय को सबसे ऊपर बताया। कहा गया है कि अब नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए सर्वसम्मति का रास्ता अपनाया जाएगा।
शनिवार रात पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी की मुलाकात के बाद यह तय हो गया था कि रविवार को फिलहाल इस ड्रामे का पटाक्षेप हो जाएगा। शनिवार रात को ही पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी को भी हाईकमान का संदेश मिल गया था। इसके बाद चुनाव अधिकारी केदार जोशी सुबह से ही दोनों प्रत्याशियों की नाम वापसी का इंतजार कर रहे थे।
हालांकि दोनों शाम करीब पौने छह बजे पार्टी कार्यालय पहुंचे। कुछ ही देर बाद चुनाव अधिकारी ने वापस आकर दोनों प्रत्याशियों के नामांकन वापस लेने की अधिकृत सूचना दी। उन्होंने कहा कि अब पार्टी की संस्कृति के अनुसार सर्वसम्मति का रास्ता अपनाया जाएगा। लेकिन नामांकन दाखिल करना भी पार्टी के लोकतंत्र की प्रक्रिया थी।
उन्होंने कहा कि चूंकि दो ही उम्मीदवार थे और दोनों ने ही पर्चे वापस ले लिए हैं, इसलिए यह चुनाव प्रक्रिया यहीं समाप्त हो जाती है। त्रिवेंद्र, तीरथ दोनों ने कहा कि पार्टी की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नाम वापस लिया है।
उल्लेखनीय है कि तीरथ बीसी खंडूरी व रमेश पोखरियाल निशंक और त्रिवेंद्र कोश्यारी के समर्थन से मैदान में उतरे थे। दोनों नामांकन कोश्यारी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाओं के बीच दाखिल हुए थे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व ने चाहा कि चुनाव प्रक्रिया अपनाई जाए तो चुनाव कार्यक्रम जारी किया। सर्वसम्मति बनाने का निर्णय लिया तो प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिए। एक अनुशासित पार्टी होने का इससे बेहतर उदाहरण क्या हो सकता है।