फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड में कांग्रेस के खिलाफ खतरनाक साजिश रच रही BJP: सोनिया गांधी

Wed, 30 Mar 2016 04:16 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
सोनिया गांधी
विज्ञापन
असम में अपने दौरे पर गई कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भाजपा कांग्रेस के खिलाफ खतरनाक साजिश रच रही है।
विज्ञापन


सरकार बनाते वक्त भाजपा के नेताओं ने जिस संविधान की शपथ ली थी अब उसकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सोनिया गांधी ने कहा कि एक संगठन के इशारे पर मनमाने ढंग से जनता द्वारा चुनी गई सरकार को बर्खास्त किया जा रहा है।

उत्तराखंड में सियासी भूचाल के बाद मामला अदालत में पहुंचने पर कानूनी दाव पेच में उलझ गया है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि बीजेपी के बाद कांग्रेस भी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है।
विज्ञापन


उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत बागी विधायकों के मतदान करने संबंधी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री का पक्ष रखने के ‌लिए कपिल सिब्बल के पहुंचे की संभावना जताई जा रही है।   उधर, मंगलवार को हाईकोर्ट के फैसले के बाद कानून के जानकार अपने तरीके से इसके निहितार्थ निकाल रहे हैं। जानकारों का कहना है कि कोर्ट का यह फैसला बागी विधायकों और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत दोनों के लिए कुछ राहत देने वाला है।

कानून के जानकारों का कहना है कि बागी विधायकों को छोड़कर यदि अन्य विधायकों की वोटिंग कराई जाती तो बाद में बागी विधायकों की वोटिंग का पेच फंसता। कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन पर टिप्पणी नहीं की और बागी विधायकों को भी मत का अधिकार दिया है।
विज्ञापन

बागी विधायकों और कांग्रेस दोनों को राहत देने वाला है फैसला

- फोटो : फाइल फोटो
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद नौटियाल ने कहा कि कांग्रेस की ओर से हाईकोर्ट में यह कहा गया था कि उसे बहुमत साबित करने दिया जाए। कोर्ट ने अपने फैसले में राष्ट्रपति शासन के बारे में कुछ नहीं कहा। कोर्ट का यह आदेश फाइनल नहीं बल्कि अंतरिम है।

वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि विधान सभा निलंबित है और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू है। ऐसे में बहुमत साबित करने के फैसले से कोर्ट ने धारा 356 को खुद में अप्रभावी मानते हुए इस पर स्टे किया है। राष्ट्रपति शासन लागू है तो बगैर 356 के स्टे के शक्ति परीक्षण नहीं कराया जा सकता।

उन्होंने कहा कि एसआर बोमई 1994 बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 356 लगाने से पहले सरकार बनने की सारी संभावनाओं को देखा जाना चाहिए और मामले का लोकतांत्रिक रूप में निपटारा होना चाहिए। अधिवक्ता आरपी पंत कहते हैं कि कोर्ट का यह फैसला बागी विधायकों और कांग्रेस दोनों को राहत देने वाला है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें