लोहाघाट (चंपावत)। एक ओर जहां सरकार किसानों की आय दोगुनी करनी की बात करती है वहीं दूसरी ओर जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के कोई इंतजाम न होने से किसानों का खेती से मोह भंग होता जा रहा है। सीमावर्ती गांवों से लोग खेतीबाड़ी छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
किसानों की ओर से हाड़तोड़ मेहनत कर खेती की जाती है लेकिन जंगली जानवर रात को खेतों में आकर उनकी खेती चौपट कर देते हैं। जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा की कोई व्यवस्था न होने से किसानों की मेहनत पर जंगली जानवर पानी फेर रहे है। किसानों का कहना है कि गांवों की सीमाएं खुली होने के चलते रात में जंगलों से जंगली जानवर खेतों में घुस जाते हैं और उनकी फसलों को उजाड़ देते हैं। किसानों का कहना है कि आने वाली सरकारों को गांवों से पलायन रोकने और किसानों का रुझान खेती के लिए बढ़ाने की दिशा में गंभीरता से कार्य करना चाहिए।
किसान हाड़तोड़ मेहनत कर फसलों को उगाते हैं लेकिन जंगली जानवर रात को आकर किसानों की फसलों को लगातार चौपट कर रहे हैं। फसलों को जंगली जानवरों से बचाने की दिशा में ठोस पहल करने की जरूरत है। - मदन पुजारी
हमारा गांव नदी और जंगल से चारों ओर से घिरा है। जंगली जानवर सब्जियों, गेहूं, जई आदि की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों ने अपने खेतों में धोती बांधने के साथ पुतले लगाए गए हैं। अब तो इस समस्या का समाधान होना चाहिए। - कृष्णानंद रतूड़ी
किसान कर्ज लेकर जैसे-तैसे खेती किसानी में लगा हुआ है। कठिन परिश्रम कर किसान खेतों में सब्जियां लगाने के साथ गेहूं, मढुवा, जौं, जई आदि की फसलें लगाता है। जंगली जानवर उनकी खेती चौपट कर उनके अरमानों में पानी फेर रहे हैं। - नवीन सिंह बोहरा, काश्तकार।
खेती को लगातार हो रहे नुकसान के चलते काश्तकारों को खेती किसानी से मोह भंग होता जा रहा है। गांवों से लोग पलायन कर शहरों की ओर बस रहे हैं। किसानों की समस्याओं का समाधान होने से उनका पलायन रुकेगा। - जगदीश जोशी, काश्तकार।