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गहरे मित्र थे गौड़ बाबा और सैयद वली बाबा

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Urs Mubarak in Banbasa
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बनबसा (चंपावत)। बनबसा में शारदा बैराज के सिल्ट इजेक्टर की बाईपास चैनल के एक ओर गौड़ बाबा और दूसरी ओर सैयद वली बाबा की मजार स्थापित है। इस ऐतिहासिक धरोहर की स्थापना करीब 104 वर्ष पहले अंग्रेज हुक्मरानों ने कराई थी।
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बताया जाता है कि सैयद वली बाबा एवं गौड़ बाबा गहरे मित्र थे। जब वर्ष 1918 में शारदा बैराज का निर्माण शुरू हुआ तो सिल्ट इजेक्टर पर काम नहीं हो पा रहा था। सिल्ट इजेक्टर की बाईपास चैनल में कई तरह के व्यवधान आ रहे थे। इससे अंग्रेज हुक्मरान परेशान थे। बताते हैं कि एक दिन एक अंग्रेज अधिकारी को स्वप्न आया कि सिल्ट इजेक्टर की बाईपास चैनल के पूर्वी छोर पर गौड़ बाबा का मंदिर और पश्चिमी छोर पर सैयद वली बाबा की मजार बनाने पर ही काम शुरू हो सकेगा। अंग्रेजों के बाईपास चैनल के एक ओर मंदिर और दूसरी ओर मजार बनाया। तभी वहां काम संपन्न हो पाया। तब से वहां प्रतिवर्ष मेरठ के नौचंदी मेले की तर्ज मजार पर उर्स मनाया जाता है जबकि मंदिर में पूजा, अर्चना की जाती है।
सैयद वली बाबा का तीन दिनी सालाना उर्स 16 से होगा
बनबसा (चंपावत)। सैयद वली बाबा का तीन दिनी सालाना उर्स 16 मई से शुरू होगा। आयोजकों ने बताया कि 16 को मिलाद शरीफ के साथ उर्स शुरू होगा। 17 को कव्वाली होगी। 17 मई को कुल शरीफ के साथ उर्स का समापन होगा। इसके लिए वली बाबा की मजार एवं उनके अभिन्न मित्र रहे गौड़ बाबा मंदिर पर भी सजावट, रोशनी की जाएगी।
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आयोजन के लिए उर्स कमेटी का गठन किया गया है। इसमें नवाब शेर खान संरक्षक, मुनीर खान अध्यक्ष, अफजाल उपाध्यक्ष, मंजूर खान सचिव, अब्दुल रहीम, जमील अहमद कोषाध्यक्ष, व्यवस्थापक निसार खान बने। इमरोज खान, अफजाल साजिद, वाजिद अंसारी, नेत्रपाल सिंह चौहान, नसीम खान, संजय अग्रवाल, कपिल भार्गव, निसार खान, मो. रफी अंसारी, मोनू राजपूत, संजय ठाकुर आदि कार्यकारिणी सदस्य बने। पहले दिन 16 मई को मिलाद शरीफ के बाद दूसरे दिन कमेटी की ओर से मजार पर चादर चढ़ाई जाएगी। इसके बाद अलीगढ़ के गुलाम हबीब पेंटर एवं रामपुर के आफताब साबरी बाबा की शान में नात और कव्वालियां पेश करेंगे।
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