चंपावत। उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और इंसान जान बचाने वाले डॉक्टरों को देवता से कम नहीं मानता है लेकिन उप जिला अस्पताल लोहाघाट में जमीन के यह देवता नहीं हैं। इस कारण लोगों को इलाज के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उप जिला अस्पताल में लंबे समय से सर्जन का पद रिक्त है। इससे एक लाख से अधिक आबादी को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। लोगों को सर्जरी संबंधी इलाज नहीं मिल पाता है। लोहाघाट विधानसभा में उप जिला चिकित्सालय सिर्फ नाम का है। यहां लोगों को बेहतर इलाज नहीं मिलता है।
सर्जन का पद रिक्त होने से लोगों को पेट, सर्जरी संबंधी उपचार के लिए 13 किमी दूर चंपावत चिकित्सालय जाना पड़ता है। अगर समय पर अस्पताल नहीं पहुंचे तो कई बार मरीज की मुश्किलें बढ़ जाती है। लोहाघाट, चौमेल, पम्दा, सुंई, बाराकोट, पाटी के लोग इलाज के लिए आते हैं। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि लोहाघाट अस्पताल में संविदा पर सर्जन को तैनात किया गया था, लेकिन उसकी अवधि समाप्त होने के करण पद रिक्त चल रहा है। संवाद
कोट
अस्पताल में सर्जन नहीं होने से 0इलाज नहीं मिल पाता है। जिला अस्पताल में भी कई बार इलाज के लिए जाना पड़ा। - मनीषा, लोहाघाट
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कुछ समय पूर्व कमर में एक गांठ बन गई थी। ऑपरेशन के लिए हल्द्वानी जाना पड़ा। सर्जन होता तो यहां काफी राहत मिलती। - संतोष, लोहाघाट।