चंपावत। हाईस्कूल में पढ़ने वाले टनकपुर के कार्तिक, मोस्टा गांव के चंदन अधिकारी, चांदनी, ऋषभ की कोरोना काल में भी पढ़ाई बाधित नहीं हुई। इसकी वजह ऑनलाइन से निशुल्क पढ़ाई होना था।
कोरोना काल में एक साल से अधिक समय तक ये मौका दिया, तल्लादेश क्षेत्र के युवा और दिल्ली के शिक्षक दिनेश जोशी ने। कोरोना के दौर में चंपावत सहित कई जिलों के हाईस्कूल और इंटर के 567 छात्र-छात्राओं को इस ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ मिला। सीईओ आरसी पुरोहित ने भी ऐसी पहल को प्रेरणाप्रद माना।
दिल्ली में रहते हुए शिक्षक जोशी चंपावत सहित कई जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के 567 विद्यार्थियों को अपनी टीम के साथ ऑनलाइन पढ़ाया। इनमेें से ज्यादातर हिस्से वे थे, जहां मोबाइल नेटवर्क की दिक्कत थी। वहां व्हाट्स एप में वीडियो भेजकर ऑफलाइन पढ़ाया।
सप्ताह के पांच दिन चार-चार घंटे हाईस्कूल-इंटर के छात्र-छात्राओं को मुख्य रूप से गणित और विज्ञान विषय पढ़ाया। अब वे और उनकी टीम नई सोच नई पहल संस्था के जरिये एक नई पहल की।
काम छूट जाने से अपने गांव लौटे प्रवासियों के परिवारों को कोरोना से बचाव के साथ गांवों में खेती, दुग्ध उत्पादन, मौनपालन सहित अन्य स्वरोजगार काम के मुनाफे को बताते हुए इसके लिए प्रेरित किया।
जोशी को कोरोना काल में ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई को लेकर ये विचार तब आया, जब उन्होंने पिछले साल मार्च के अंतिम सप्ताह में शुरू हुई कोरोना की पहली लहर के दौरान अपने गांव तामली बात की।
पता चला कि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई तो ठप थी ही, दिनभर समय का भी कोई उपयोग नहीं हो रहा था। नई सोच-नई पहल संस्था बनाकर ऐसे ग्रामीण छात्र-छात्राओं को एक साल से अधिक समय तक पढ़ाया। लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया गया।