पाटी (चंपावत)। चंपावत जिले में चार नए आदर्श गांव बनाए जाने हैं लेकिन पहले से बने आदर्श गांव इन नए आदर्श गांवों पर सवाल उठ रहे हैं। सांसद आदर्श गांव रौलमेल इस विडंबना की एक बानगी है। वर्ष 2016 में राज्यसभा के तत्कालीन सदस्य महेंद्र सिंह माहरा ने इस गांव को गोद लिया था। नई सुविधा तो दूर, पुराने कार्यों को भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका है। 2016-17 में सांसद आदर्श गांव में शामिल इस गांव में न दवाई की व्यवस्था है न ही आठवीं कक्षा से आगे की पढ़ाई की। यहां तक कि गर्भवती महिलाओं के प्रसव से लेकर शिशुओं के टीकाकरण तक का कोई इंतजाम नहीं है।
पाटी ब्लॉक के रौलमेल ग्राम पंचायत के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए तत्कालीन सांसद माहरा ने इस गांव को सांसद आदर्श गांव योजना के तहत गोद लिया लेकिन छह साल बाद भी यह गांव आदर्श गांव नहीं बन सका है। आदर्श तो दूर, मामूली सुविधाओं से युक्त गांव की श्रेणी में भी नहीं आ सका है। भविष्य संवारने के लिए आठवीं से आगे की पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं है। एक हजार से अधिक आबादी वाले रौलमेल ग्राम पंचायत में दो (रौलमेल और बड़ैत) प्राइमरी और एक (मैरोली) जूनियर हाईस्कूल है। आठवीं से आगे की पढ़ाई के लिए 11 किमी दूर पाटी जाना पड़ रहा है।
बीमार होने पर तो किसी भी तरह के इलाज है ही नहीं। अस्पताल तो दूर, एएनएम केंद्र तक नहीं है। मामूली उपचार के लिए भी पाटी की दौड़ इस ग्रामीण क्षेत्र की मजबूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि पशु केंद्र की लंबे समय से की जा रही मांग पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। छिलकाछीना से बड़ैत तक का मार्ग भी कायदे का नहीं है। वहीं सात साल पहले रौलमेल में 35 लाख रुपये से बने सामुदायिक विपणन केंद्र का भी कोई उपयोग नहीं हो रहा है। यह भवन खाली है। इधर बीडीओ सुभाष लोहनी का कहना है कि कृषि विभाग के जरिये इस विपणन केंद्र का उपयोग कराया जाएगा।
टूटे मकानों की भी नहीं हो पा रही मरम्मत
पाटी (चंपावत)। आदर्श गांव रौलमेल में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा भी अधूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि हर घर नल हर घर जल योजना के तहत 180 कनेक्शन होने थे, लेकिन अभी महज 70 ही कनेक्शन हो सके हैं। काफी लोगों को दूरदराज से पानी ढोना पड़ रहा है। दो परिवारों के पास मकान भी नहीं है। वहीं आपदा में क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए भी ग्रामीणों को भटकना पड़ रहा है।
प्रेम राम का मकान पिछले साल अक्तूबर की आपदा में टूटा, लेकिन मकान की मरम्मत के लिए एक भी रुपया नहीं मिला। इसी तरह कुछ साल पहले बड़ैत गांव के सुरेश चंद्र का मकान भी जमींदोज हुआ, तो उन्हें मदद के नाम पर सिर्फ 15 हजार रुपये की मदद मिली। सुरेश चंद्र कहते हैं कि मकान में रहना जोखिमभरा है, इस वजह से वे गांव में दूसरी जगह रहने के लिए मजबूर हैं।
नए आदर्श गांव
चंपावत ब्लॉक - सिमल्टा।
लोहाघाट ब्लॉक - बिंडातिवारी।
बाराकोट ब्लॉक - बापरू।
पाटी ब्लॉक - चौड़ाकोट।
रौलमेल बस नाम का आदर्श गांव है। जहां इलाज की तक सुविधा नहीं हो, वह गांव आखिर कैसे आदर्श कहा जा सकता है। दूसरी जरूरी सुविधाओं के भी बुरे हाल हैं। मामले को बीडीसी बैठक में उठाया जाएगा। - रवीश लडवाल, प्रधान।
इस आदर्श गांव में न जरूरी सुविधाएं हैं और न ही रोजी-रोटी की कोई संभावनाएं। आदर्श होने के बाद भी अपने गांव में गर्भवती महिलाओं के लिए तक सुविधा नहीं है। - मनोहर सिंह, ग्रामीण।
रौलमेल गांव को विकास से जोड़ने के लिए 2016 में सांसद आदर्श गांव में शामिल किया गया था। यहां के विकास के लिए कई योजनाएं शुरू की, लेकिन प्रशासन की ओर से उन योजनाओं को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं ली गई। मार्च 2018 में कार्यकाल पूरा होने के बाद सरकारी मशीनरी ने इस गांव की अनदेखी कर दी। - महेंद्र सिंह माहरा, पूर्व सांसद।
चंपावत जिले के चारों विकासखंडों में एक-एक गांव को आदर्श गांव बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इन नए गांवों का तो विकास होगा ही, पहले से सांसद आदर्श गांव में शामिल रौलमेल गांव को संवारने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए जल्द ही पाटी ब्लॉक के अधिकारियों समेत संबंधित विभागों के मुखियाओं के साथ चर्चा की जाएगी। - नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।