चंपावत। उत्तराखंड में पांचवां मौका होगा जब मुख्यमंत्री को विधानसभा का सदस्य बनने के लिए उप चुनाव का सहारा लेना होगा। इस बार अब तक मिल रहे संकेत के मुताबिक चंपावत सीट इस उप चुनाव की धुरी बनेगा। माना जा रहा है कि पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों की ओर से सीएम की सीट पर मोहर लगाए जाने के बाद यहां के विधायक कैलाश गहतोड़ी विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा सौंप सकते हैं।
लगातार दूसरी बार चंपावत से विधायक बने कैलाश गहतोड़ी ने मतगणना वाले दिन 10 मार्च को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए सीट छोड़ने का एलान किया था। अब पार्टी की चंपावत जिला इकाई की ओर से प्रदेश संगठन को प्रस्ताव भेजने और कार्यकर्ताओं की मांग के चलते हलचल तेज हो गई। पार्टी के लिए चंपावत सीट बेहद अनुकूल मानी जा रही है। जिलाध्यक्ष दीपक पाठक का कहना है कि सीएम पुष्कर सिंह धामी यहां से रिकार्ड वोटों से जीतेंगे, साथ ही क्षेत्र के विकास को भी पंख लगेंगे।
राज्य बनने के बाद अब तक चार मुख्यमंत्री उप चुनाव लड़ चुके हैं। किसी भी उप चुनाव में उन्हें जीतने के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ी। कांग्रेस की पतली हालत को देखते हुए जानकारों का मानना है कि इस बार भी मुकाबला एकतरफा रह सकता है।
विधायक रहते सिर्फ तीन मुख्यमंत्री बने
चंपावत। अब तक सिर्फ डॉ. रमेश चंद्र पोखरियाल, त्रिवेंद्र सिंह रावत और पुष्कर सिंह धामी (मुख्यमंत्री के रूप में जुलाई 2021 में पहला कार्यकाल) ही विधायक रहते मुख्यमंत्री बने। सांसद से मुख्यमंत्री बने तीरथ सिंह रावत का कार्यकाल छह माह से भी कम रहने से चुनाव की नौबत नहीं आई।
उत्तराखंड में उप चुनाव लडने वाले मुख्यमंत्री
2002: पंडित नारायण दत्त तिवारी।
2007: मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बीसी खंडूरी।
2012: विजय बहुगुणा।
2014: हरीश रावत।
कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं
दून में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी में नदारद रहे लोहाघाट के विधायक
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। प्रदेश की तरह ही चंपावत जिले में भी कांग्रेस की हालत पतली है। कमजोर संगठन और उस पर गुटबाजी से पार्टी की दिक्कतें बढ़ रही हैं। यहां तक कि देहरादून में कांग्रेस के नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष करन महरा की ताजपोशी में भी लोहाघाट के विधायक सहित इस जिले का कोई भी कद्दावर नेता मौजूद नहीं था। सियासी जानकर इस गैर मौजूदगी के कई अर्थ लगा रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस प्रदेश के नव नियुक्त अध्यक्ष करन माहरा के देहरादून में पदभार में 11 विधायक अनुपस्थित रहे थे। सिर्फ आठ विधायक ही कार्यक्रम में मौजूद थे। गैर मौजूद रहे विधायकों में लोहाघाट के विधायक खुशाल सिंह अधिकारी भी शामिल थे। उनके अलावा पिथौरागढ़ जिले के कांग्रेस के दोनों विधायक भी गैरहाजिर रहे। राजनीतिक जानकार इस अनुपस्थिति को कांग्रेस की अंदरूनी उठापटक से जोड़ कर देख रहे हैं। उधर इस संबंध में विधायक खुशाल सिंह अधिकारी का पक्ष करने का प्रयास किया लेकिन फोन नहीं उठने से उनका पक्ष नहीं जाना जा सका।
न अभी चंपावत से भाजपा के विधायक ने इस्तीफा दिया है और न ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत से चुनाव लड़ने का एलान किया है। पार्टी इस मामले में औपचारिक घोषणा के बाद ही कोई प्रतिक्रिया देगी। इतना तय है कि अगर चंपावत सीट पर उप चुनाव हुआ तो कांग्रेस वाकओवर नहीं देगी। पार्टी पूरी ताकत से मैदान में उतरेगी। जहां तक लोहाघाट के विधायक का प्रदेश अध्यक्ष के पदभार कार्यक्रम में देहरादून में अनुपस्थित रहने की बात है, विधायक आवश्यकीय निजी कारणों से कार्यक्रम में मौजूद नहीं रह सके।
पूरन सिंह कठायत,
जिलाध्यक्ष, कांग्रेस, चंपावत।