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नाम भर की तहसील है बाराकोट

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लोहाघाट (चंपावत)। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लोहाघाट और घाट के बीच है बाराकोट। आठ साल पहले सृजित बाराकोट तहसील छोटी प्रशासनिक इकाई के मकसद को पूरा नहीं कर रही है।
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इस तहसील में न तहसीलदार और न नायब तहसीलदार की तैनाती है। एसडीएम का पद यहां स्वीकृत नहीं है। यहां के लोग 13 किमी दूर लोहाघाट जाने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में लोग इस तहसील को सृजित करने के औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों को सुविधा देने के लिए 20 जनवरी 2014 को बाराकोट उप तहसील को उच्चीकृत कर तहसील का दर्जा दिया गया। तहसीलदार और नायब तहसीलदार जैसे महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली हैं। रजिस्ट्रार कानूनगो की तैनाती जरूर है, लेकिन बाराकोट के रजिस्ट्रार कानूनगो को लोहाघाट की अतिरिक्त जिम्मेदारी है।
दस राजस्व क्षेत्रों में पटवारी के भी आधे पद खाली हैं। सिर्फ पांच पटवारी से काम चल रहा है। अधिकारियों की कमी से काम में देरी के साथ लोगों को कई तरह की दिक्कतें हो रही है। तहसील में भूमि दाखिल खारिज, जांच रिपोर्ट समय से नहीं बन पा रही हैं। यहां के लोगों को तहसील के कार्यों के लिए 13 किमी दूर लोहाघाट आना पड़ रहा है।
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बाराकोट तहसील में एसडीएम का पद सृजित न होने से परेशानी हो रही है। इसके लिए शासन से आग्रह किया जाएगा। खाली पदों में तैनाती के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। - विनीता फर्त्याल, ब्लॉक प्रमुख, बाराकोट।
तहसील बनने के आठ साल से अधिक बीतने के बाद भी यहां कोई सुविधा नहीं है। एसडीएम का पद सृजित नहीं है। अन्य सृजित पदों में से ज्यादातर पद खाली हैं। - नंदाबल्लभ बगौली, ज्येष्ठ उपप्रमुख, बाराकोट।
अधिकारी न होने से लोगों को बाराकोट तहसील बनने का कोई लाभ नहीं है। ऐसे में लोगों को अब भी प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी काम के लिए दूर जाना पड़ रहा है। - हरीश वर्मा, पूर्व अध्यक्ष, व्यापार मंडल, बाराकोट।
बाराकोट तहसील में अधिकारियों सहित सभी खाली पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। अधिकारियों की कमी से कार्य संचालन में दिक्कत हो रही है। - रिंकू बिष्ट, एसडीएम, लोहाघाट।
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