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दावों की कमी नहीं लेकिन सुविधाओं को संजीदगी नहीं...

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रज्जुमार्ग का जून 2015 में हुए शिलान्यास का शिलापट। - फोटो : TANAKPUR
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टनकपुर (चंपावत)। प्रदेश के सबसे बड़े आध्यात्मिक स्थलों में शुमार मां पूर्णागिरि धाम के मेले की तैयारियों का सोमवार को जायजा लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र में लाने की कवायद की है लेकिन धाम में सुविधाओं के विस्तार को लेकर किसी भी सरकार ने खास संजीदगी नहीं दिखाई है। धाम के लिए पेयजल योजना का काम तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के एलान के सवा दो साल बाद भी शुरू नहीं हुआ। इतना ही नहीं रज्जुमार्ग का तो एक बार शिलान्यास और दूसरी बार एलान हुआ, लेकिन काम शुरू होने का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है।
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हर साल 30 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले मां पूर्णागिरि धाम को धार्मिक पर्यटन का अहम पड़ाव बनाने के सरकार के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं। क्षेत्र में पेयजल की कमी की शिकायत खुद मंदिर समिति ने सीएम से की। पेयजल किल्लत को दूर करने के लिए 23 अक्तूबर 2019 को तत्कालीन सीएम ने मां पूर्णागिरि धाम (गुरुत्व) पेयजल योजना का एलान किया था। इसके लिए राज्य सेक्टर कार्यक्रम के अंतर्गत 397.08 लाख रुपये भी मंजूर हुए लेकिन काम अभी भी शुरू नहीं हुआ है। पेयजल निगम के ईई वीके पाल कहते हैं कि 14 किमी लंबी योजना की निविदा की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से काम शुरू नहीं हो सका है।
बात सिर्फ पेयजल संकट की ही नहीं है, रज्जुमार्ग को लेकर तो इससे भी बुरा हाल है। पीपीपी मोड में 35 करोड़ रुपये से हनुमान चट्टी से काली मंदिर तक बनने वाले 903.225 मीटर लंबे रज्जुमार्ग का एक बार शिलान्यास और इसके बाद एक बार एलान हो चुका है। कांग्रेस सरकार में 15 जून 2015 को रज्जुमार्ग का तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शिलान्यास किया था और फिर भाजपा सरकार में 18 जुलाई 2017 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रज्जुमार्ग की घोषणा की। केआर आनंद एंड केआरए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट कंपनी के साथ एमओयू भी हुआ लेकिन काम अभी भी शुरू नहीं हो सका है। अब सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस काम को आचार संहिता खत्म होने के बाद तेजी से कराने का दावा किया है। इसी तरह मुख्य मंदिर की दरार वाली पहाड़ी के ट्रीटमेंट का काम 2009 से अब तक लटका ही है। संवाद
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