चंपावत। महज पांच दिन पहले हुए शिक्षक दिवस पर गुरुजनों के मान-सम्मान को लेकर खूब कसीदे पढ़े गए। इन दिनों शिक्षक पर्व भी चल रहा है लेकिन सामान्य दिनों में शिक्षकों के साथ कैसा बर्ताव होता है, इसकी एक बानगी है पाटी क्षेत्र का शिक्षा कार्यालय। 2015 में सेवानिवृत्त हुए एक गुरुजी को जीपीएफ रकम के लिए छह साल बाद भी तरसना पड़ रहा है। निर्धारित समय में कोषागार में बिल प्रस्तुत नहीं करने पर ये बिल कालातीत हो गए हैं।
पाटी ब्लॉक के शिक्षक महेश चंद्र सकलानी 2015 को सेवानिवृत्त हुए। उनका कहना है कि जीपीएफ राशि के लिए वे कई बार आग्रह कर चुके हैं लेकिन उन्हें जीपीएफ की 10 प्रतिशत बकाया राशि 4.93 लाख रुपये का भुगतान आज तक नहीं हो सका है। उन्होंने इसे लेकर उप शिक्षाधिकारी कार्यालय के एक लिपिक पर अंगुली उठाई है। बिलों के कालातीत होने की सूचना पाटी के उप कोषाधिकारी ने पत्र के जरिये महालेखाकार को भी भेजी है। पाटी का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे बाराकोट के उप शिक्षाधिकारी भानु प्रताप ने बताया कि हीलाहवाली के चलते संबंधित पटल के बाबू दीपक से जवाबतलब करते हुए अगस्त का वेतन रोका गया है।
सेवानिवृत्त शिक्षक महेश चंद्र सकलानी के जीपीएफ के बकाया 10 प्रतिशत रकम के भुगतान के लिए फिर से कार्रवाई की गई है। कोरोना महामारी के अलावा खाते के प्रारंभिक अवशेष नहीं दर्शाने की वजह से अड़चन आई। अब महालेखाकार को पत्र भेज राशि के भुगतान के लिए आग्रह किया गया है। - भानु प्रताप, उप शिक्षाधिकारी, पाटी।
यहां स्वास्थ्य विभाग के भी बीमार हाल
चंपावत। शिक्षा महकमे में ही नहीं स्वास्थ्य विभाग का रवैया भी अपने सेवानिवृत्त कर्मियों को लेकर उदासीन है। नवंबर 2018 में जिला अस्पताल से सेवानिवृत्त हुए चीफ फार्मासिस्ट जगदीश चंद्र कांडपाल भी सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले देयकों के लिए तरस रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें न फंड मिल सका और न ही पेंशन और नहीं एरियर। कांडपाल का कहना है कि रुपये मिलने में देरी से उनके रोजमर्रा के खर्चे के अलावा मकान निर्माण और दूसरे जरूरी कामों पर भी असर पड़ रहा है। पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी का कहना है कि मामले का जल्द से जल्द निस्तारण के लिए कार्रवाई करेंगे।