चंपावत। गुमदेश क्षेत्र के दिगालीचौड़ जीआईसी में पढ़ाई तो दूर छात्र-छात्राओं की प्यास बुझाने के भी इंतजाम नहीं हैं। पेयजल संयोजन न होने से परिसर में तो पानी नहीं है।
प्यास बुझाने के लिए विद्यार्थियों को 250 मीटर दूर जाना पड़ रहा है। इसकी मार मध्याह्न भोजन योजना पर भी पड़ रही है। वहीं चहारदीवारी न होने से कॉलेज परिसर में अतिक्रमण का खतरा भी पनप रहा है।
दिगालीचौड़ में छात्रसंख्या 559 है। वहां प्रधानाचार्य की कुर्सी सात साल से खाली है। पढ़ाने के लिए भी गुरुजनों की कमी है। दो प्रवक्ताओं सहित तीन शिक्षकों की तैनाती लंबे समय से न होने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है।
ग्रामीण बताते हैं कि प्रभारी प्रधानाचार्य रमेश सिंह रावत व्यवस्था बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद चहारदीवारी न होने से परिसर में मवेशी आ रहे हैं। अतिक्रमण की भी आशंका है।
हालात न सुधरे तो करेंगे आंदोलन
चंपावत। स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) और अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन करेंगे।
एसएमसी अध्यक्ष दान सिंह भंडारी और पीटीए अध्यक्ष गोविंद सिंह का कहना है कि शिक्षाधिकारियों और प्रशासन से कई बार आग्रह के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया है। एक माह के भीतर व्यवस्था में सुधार न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
दिगालीचौड़ जीआईसी में खाली पदों को भरने के लिए पहले भी निदेशालय के लिए पत्र भेजा गया है। अब फिर से पत्र भेजा जाएगा। पेयजल संयोजन के लिए जल संस्थान से मांग की जा रही है। अतिक्रमण को रोकने के लिए चहारदीवारी के लिए बजट की मांग कर अतिक्रमण करने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
- आरसी पुरोहित, सीईओ, चंपावत।