फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां पूर्णागिरि धाम से मिल रही पहचान लेकिन मिल नहीं रहा मेला अनुदान

विज्ञापन
विज्ञापन
चंपावत। मां पूर्णागिरि धाम चंपावत जिले को उत्तराखंड के बाहर भी विशेष पहचान देती है। इसके बावजूद मेले के आयोजन के लिए सरकारी अनुदान नहीं मिल पा रहा है। इस कारण आयोजक संस्था जिला पंचायत को तीन साल में ही 31 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
विज्ञापन

मां पूर्णागिरि धाम मेले में 2008 तक प्रदेश शासन से मेला अनुदान मिलता रहा है। तब आखिरी बार 15 लाख रुपये मिले। इसके बाद से कभी भी अनुदान नहीं मिला। जिला पंचायत के एएमए भगवत पाटनी का कहना है कि अनुदान के लिए हर बार पत्र भेजा जाता है लेकिन अनुदान नहीं मिलता। इससे पंचायत को मेले के संचालन में आर्थिक नुकसान होता है। लंबे समय से अनुदान बंद होने से मेले में तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए व्यवस्थाओं को कराने में दिक्कत आती है।
अस्थायी टिनशेड में एक दशक में निकल गए 2.13 करोड़
चंपावत। कोरोना के चलते 2020 में मां पूर्णागिरि मेला सिर्फ एक सप्ताह चल सका था। 2021 में 30 मार्च से शुरू होने वाले मेले की अवधि 30 दिन तय की गई है। इस सरकारी अवधि में हर साल अस्थायी निर्माण में लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। पिछले एक दशक में मेला क्षेत्र में होने वाले अस्थायी निर्माण में ही 213.43 लाख रुपये खर्च हुए हैं। यह स्थिति आरक्षित वन भूमि की वजह से आई है। हर साल अस्थायी निर्माण पर औसतन 21.34 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।
विज्ञापन

आमतौर पर तीन महीने तक चलने वाले सरकारी मेले में 30 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन करते हैं। जिला पंचायत, मेला मजिस्ट्रेट कार्यालय, रैनबसेरा, सफाई, स्वास्थ्य, सुरक्षा, यात्रियों की सुरक्षा सहित तमाम जरूरी व्यवस्था की जाती है। इन आवासीय व्यवस्था के अंतर्गत करीब 21 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में अस्थायी टिन शेड बनाए जाते हैं। डीएफओ आरसी कांडपाल का कहना है कि आरक्षित वन क्षेत्र में गैर वानिकी कार्य प्रतिबंधित है। इसके चलते मां पूर्णागिरि धाम मेला क्षेत्र के आरक्षित वन क्षेत्र में पक्का निर्माण नहीं कराया जा सकता है।
10 सालों में आवासीय टिन शेड में खर्च
वर्ष खर्च (लाख रुपये में)
2012 15.80
2013 23.21
2014 34.60
2015 24.82
2016 24.35
2017 31.20
2018 24.42
2019 24.00
2020 08.00
2021 03.00
कुल 213.43
मां पूर्णागिरि धाम के मेला क्षेत्र का करीब 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आरक्षित वन क्षेत्र में है। इस कारण यहां स्थायी निर्माण मुमकिन नहीं है। अलबत्ता जिला पंचायत के जरिये अब मेला क्षेत्र में लीज की जमीन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
विज्ञापन

- हिमांशु कफल्टिया, एसडीएम, टनकपुर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें