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चंपावत में जंगल की आग से आबादी क्षेत्र प्रभावित नहीं

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गणाईगंगोली के भेटकुड़ी जंगल में लगी आग। इसी के कुछ दूरी पर बस्ती भी है। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
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चंपावत। चंपावत वन प्रभाग के डीएफओ आरसी कांडपाल का कहना है कि जिले में जंगल की आग की घटनाएं पिछले वर्ष के समान हैं लेकिन इससे हुआ नुकसान 10 हेक्टेयर कम है। इस साल फायर सीजन में दो मई तक कुल 79 घटनाओं में कुल 52 हेक्टेयर वन संपदा प्रभावित हुई है जबकि पिछले साल 73 घटनाओं में 57.77 हेक्टेयर वन संपदा को नुकसान पहुंचा था। जंगल की आग से आबादी वाला कोई भी क्षेत्र प्रभावित नहीं हुआ है।
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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने 27 अप्रैल को चंपावत के बूम, भिंगराड़ा, देवीधुरा, सकदेना, मछियाड़, पूर्वी तल्लापाल वेलून आदि जंगल में लगी आग से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। डीएफओ कांडपाल का कहना है कि 27 अप्रैल को चंपावत प्रभाग में जंगल में आग की कुल पांच घटनाओं में 1.75 हेक्टेयर जंगल पर असर पड़ा था। इसमें भिंगराड़ा की दो घटनाओं में 0.75 हेक्टेयर, देवीधुरा में वन पंचायत सहित कुल तीन घटनाओं में एक हेक्टेयर क्षेत्र आग से प्रभावित हुआ था। नेपाल सीमा से लगे बूम में 27 अप्रैल को आग की कोई घटना नहीं हुई। डीएफओ का कहना है कि उनका कहना है कि बूम क्षेत्र नेपाल सीमा से लगा है और जो आग जीपीएस में दर्शाई गई है, वह बूम में न होकर काली नदी के पार नेपाल के जंगल की है। कैंपा से मिले 10 लाख रुपये का आग से बचाव में मानव संसाधन से लेकर क्रू स्टेशन और अन्य प्रकार से उपयोग किया जा रहा है। कहा कि एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप आग से बचाव के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
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