चंपावत। चंपावत जिले में पहली बार गन्ने की खेती होगी। पहाड़ और मैदान से मिलकर बने इस जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर और बनबसा में इस खेती को प्रयोग के तौर पर शुरू किया जाएगा। इसके लिए गन्ना विकास परिषद सर्वे कराने के साथ किसानों को प्रेरित करेगा। इस खेती के लिए चयनित किसानों को काशीपुर के गन्ना शोध संस्थान में प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
गन्ना विकास परिषद गन्ने की खेती के वैज्ञानिक तरीकों और इससे होने वाले फायदों की जानकारी देकर चंपावत जिले के काश्तकारों को प्रेरित करेगा। परिषद ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। बनबसा और टनकपुर को गन्ना बेल्ट बनाने का प्रस्ताव है। परिषद का कहना है कि इस काम में चंपावत जिले के कृषि, उद्यान, सहकारिता और अन्य संबंधित विभागों से समन्वय बनाकर किया जाएगा, ताकि 2024 में चंपावत जिले में पहली बार गन्ने की खेती शुरू कराई जा सके। संवाद
कोट
चंपावत जिले का मैदानी हिस्सा गन्ने की खेती के लिए मुफीद है। इसकी खेती के जरिये किसान कम मेहनत में अधिक आय अर्जित कर सकेंगे। बाजार की भी दिक्कत है। टनकपुर-बनबसा क्षेत्र के सर्वे और किसानों से बात कर 2024 में गन्ने की खेती प्रायोगिक रूप से शुरू कर दी जाएगी। वैसे पिछले दो साल से दो पहाड़ी जिले चमोली और पिथौरागढ़ में भी गन्ने की खेती की कवायद की गई है। - कपिल मोहन, सहायक आयुक्त, गन्ना विकास परिषद, ऊधमसिंह नगर।