11 अक्तूबर को 60 वर्ष पूरे करने का हवाला देकर स्कूल ने कार्यमुक्त की गई भोजनमाता शकुंतला देवी ने गलत ढंग से कार्यमुक्त करने के साथ हटाए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। इस संबंध में उन्होंने एसडीएम को शुक्रवार को भेजे पत्र में कहा कि हटाए जाने का प्रस्ताव न एसएमसी में पास हुआ और नहीं पीटीए की बैठक में। लिहाजा 11 अक्तूबर को प्रधानाचार्य की ओर से जारी आदेश को निरस्त किया जाए।
विवाद से बचने के लिए मैं अपना पक्ष प्रधानाचार्य को लिखित रूप से प्रस्तुत कर रहा हूं। स्कूल का वातावरण सौहार्दपूर्ण बनाने में मैं पूरा सहयोग करूंगा। साथ ही पूरी तरह से एसएमसी के निर्णय के साथ हूं। नियमानुसार सुनीता देवी का भोजनमाता के रूप में चयन होता है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। मुझ पर लगाए गए आरोप या तो सुनीता देवी साबित करें या वापस लें। -नरेंद्र जोशी, अध्यक्ष, पीटीए, जीआईसी, सूखीढांग।
... मुकदमा वापस लेंगी सुनीता देवी
भोजनमाता नियुक्ति विवाद निपटने के साथ ही इसे लेकर चल रही मुकदमेबाजी भी वापस हो जाएगी। भोजनमाता सुनीता देवी ने कहा कि जातिगत टिप्पणी से ज्यादा नियुक्ति को फर्जी बताने से उनकी भावना आहत हुई। अब नियुक्ति के मामले के समाधान तक पहुंचने पर वे गुरुवार को दर्ज मुकदमा वापस लेंगी। इसे लेकर जल्द ही जरूरी औपचारिकता की जाएगी।
बता दें कि सुनीता देवी ने भोजनमाता विवाद के दौरान अभद्रता और जातीय भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए चल्थी चौकी में तहरीर दी थी। जिस पर छह (बीडीसी सदस्य दीपा जोशी, पीटीए अध्यक्ष नरेंद्र जोशी, महेश चौड़ाकोटी, बबलू गहतोड़ी, शंकर दत्त और सतीश चंद) लोगों के खिलाफ गुरुवार को एससी-एसटी अधिनियम और आईपीसी की धारा 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। एसपी देवेंद्र पींचा ने बताया कि मुकदमा वापस लेने के दो तरीके हैं। पहला उच्च न्यायालय में आवेदन देकर प्राथमिकी को रद्द किया जाता है। दूसरा शपथ पत्र देने के बाद जिला अदालत में 164 के बयान के जरिये दर्ज मुकदमे को वापस लिया जा सकता है।