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चंपावत जिले की व्यवस्था छिन्नभिन्न

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मूसलाधार बारिश की भेंट चढ़ा बेलखेत के गांवों को जोड़ने वाला पैदल पुल। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। रविवार शाम से मंगलवार रात तक चंपावत में 507 और लोहाघाट क्षेत्र में 608 मिलीमीटर बारिश हुई है। इस आसमानी आफत ने चंपावत जिले की व्यवस्थाओं को तार-तार कर दिया है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों के बुरे हाल हैं। ये पूरा इलाका अलग-थलग पड़ गया है। न सड़क संपर्क है और न ही संचार संपर्क। दिनभर संचार संपर्क था।
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शाम को एयरटेल सेवा ने काम करना शुरू किया। लेकिन दूसरे मोबाइल नेटवर्कों वाले डेढ़ लाख लोग संचार सेवा से कटे हुए हैं। संचार सेवा ठप होने से लोग मौसमी मार में अपनों की कुशलक्षेम नहीं जाना पा रहे हैं, तो वहीं नुकसान की जानकारी भी प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग तक पहुंचाने में दिक्कत आ रही है।
बिजली आपूर्ति ठप होने की मार पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ रही है। लोहाघाट और पाटी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति ठप है। वहीं चंपावत और बाराकोट में टैंक में सिल्ट आने से पेयजल आपूर्ति पर मार पड़ी है। वहीं सोमवार से सड़क संपर्क भी बंद है। चंपावत और लोहाघाट का मैदानी क्षेत्रों से सड़क संपर्क भी कटा है।
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पहाड़ी क्षेत्रों में मंगलवार से ब्लैक आउट
चंपावत। चंपावत जिले के लोग दो दिन से अंधेरे में हैं। चंपावत, लोहाघाट, पाटी और बाराकोट ब्लॉक में लगातार दूसरे दिन बुधवार को ब्लैक आउट है। गांव ही नहीं, शहरों में भी बिजली न होने से लोग भारी फजीहत झेल रहे हैं। रात तो अंधेरे में कटी ही, मोबाइल चार्जिंग के लिए भी मुश्किल हो रही है।
ऊर्जा निगम के ईई एसके गुप्ता ने बताया कि मूसलाधार बारिश और भारी-भरकम पेड़ गिरने से अनेकों जगह पर खंभे और लाइनें टूटी हैं। सबसे बड़ी दिक्कत कंतगांव के पास दो पोलों के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने से हुई है।
इस कारण पूरे पहाड़ की बिजली आपूर्ति बाधित है। ईई का कहना है कि लमगड़ा से चंपावत और लोहाघाट के शहरी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति का प्रयास किया गया, लेकिन वहां भी कई जगह गिरे पेड़ों से आपूर्ति में व्यवधान आ रहा है।
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