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चंपावत में जल्द अस्तित्व में आएगी डिप्टेश्वर झील

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चंपावत जिला मुख्यालय के डिप्टेश्वर में इसी स्थान में प्रस्तावित है झील। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। चंपावत जिला मुख्यालय के बाशिंदों के लिए अच्छी खबर है। यहां डिप्टेश्वर में जल्द ही बहुप्रतीक्षित झील अस्तित्व में आ जाएगी। भूगर्भ वैज्ञानिकों की सर्वे रिपोर्ट के बाद सिंचाई विभाग की ओर से झील निर्माण की कवायद तेज कर दी गई है।
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आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की देखरेख में झील की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसके साथ ही प्रस्तावित झील के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों में किसानों को भूमि का मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। शासन की ओर से सिंचाई विभाग को भूगर्भीय सर्वे और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए 20.53 लाख रुपये की टोकन मनी दी जा चुकी है।
प्रदेश सरकार ने 13 सितंबर 2018 को सिमल्टा स्थित कूर्म सरोवर के साथ चंपावत जिला मुख्यालय में गंडकी नदी में डिप्टेश्वर झील निर्माण को स्वीकृति दी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने झील निर्माण की परियोजना गठन से पूर्व प्रारंभिक सर्वेक्षण और भूगर्भीय रिपोर्ट तैयार करने के लिए टोकन मनी भी जारी की थी।
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सिंचाई विभाग के अपर सहायक अभियंता लक्ष्मण सिंह के अनुसार भूगर्भीय रिपोर्ट और अन्य तकनीकी परीक्षण का कार्य पूरा कर लिया गया है। डीपीआर को मंजूरी मिलते ही झील का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
400 मीटर लंबी और 60 मीटर चौड़ी होगी झील
चंपावत। डिप्टेश्वर में प्रस्तावित झील की लंबाई 400 मीटर, चौड़ाई 60 मीटर, गहराई 13 मीटर होगी। इससे पहले सिंचाई विभाग की ओर से वर्ष 2009 में भी डिप्टेश्वर झील का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था लेकिन तब 6.95 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित झील के लिए वित्तीय और तकनीकी मंजूरी नहीं मिल पाई थी।
चार गांवों की आंशिक भूमि होगी जलमग्न
चंपावत। डिप्टेश्वर झील निर्माण में चार गांवों की आंशिक भूमि जलमग्न होगी। इन गांवों में पुनेठी, चौकी, त्यारकूड़ा, कनलगांव ग्राम पंचायतें शामिल हैं। प्रभावित होने वाले किसानों की समस्याओं के निदान को लेकर 26 नवंबर को डिप्टेश्वर मंदिर परिसर में अंतिम बैठक का आयोजन किया जा रहा है।
डिप्टेश्वर झील से चंपावत को बहुआयामी लाभ होगा। इससे यह जिला न केवल पर्यटन के रूप में पहचान बना सकेगा, बल्कि पेयजल और रोजगार बढ़ाने में भी मददगार होगा। - लता बिष्ट, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, चंपावत।
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