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कांग्रेस का ओल्ड इज गोल्ड पर रहा भरोसा

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Congress's trust in Old is Gold
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चंपावत। अब तक हुए चार विधानसभा चुनावों में भाजपा ने चंपावत सीट से हर बार नया चेहरा उतारा तो कांग्रेस ने हमेशा एक ही नाम पर एतबार किया। नतीजा चाहे कांग्रेस के पक्ष में रहा हो या उसके विरोध में, पार्टी का चेहरा तो एक ही रहा।
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सीट पर कांग्रेस से बागी उम्मीदवारों की भी कमी नहीं रही। पिछले चुनाव को छोड़ हर चुनाव में पार्टी में बगावत हुई। 2017 में कोई विद्रोही बतौर प्रत्याशी मैदान में नहीं उतरा लेकिन तबके जिलाध्यक्ष सहित सात महत्वपूर्ण नेता कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए। देखना दिलचस्प होगा कि इस बार के चुनाव में भी कांग्रेस हेमेश खर्कवाल को ही टिकट देती है या कोई नया दांव आजमाती है? चंपावत सीट पर पार्टी के आठ नेताओं ने दावा ठोका है लेकिन सूत्र बताते हैं कि पार्टी नेतृत्व ओल्ड इज गोल्ड पर भरोसा जता सकता है।
चंपावत सीट उत्तराखंड की उन चुनिंदा सीटों में से एक है, जिस पर किसी दल ने एक ही प्रत्याशी पर लगातार भरोसा जताया है। 2002 में हुए पहले चुनाव से 2017 तक के सभी चुनाव में कांग्रेस ने हेमेश खर्कवाल को प्रत्याशी बनाया। पार्टी ने 2002 और 2012 में यहां जीत हासिल की, जबकि दो बार हार झेली। हालांकि हर चुनाव में पार्टी की राह आसान नहीं रही। भाजपा से मिलने वाली टक्कर से ज्यादा बड़ी चुनौती अपनी पार्टी से विद्रोह का रहा। तीन चुनाव में पांच दिग्गज कांग्रेस नेताओं ने विद्रोही उम्मीदवार के रूप में या दूसरे दल में शामिल होकर चुनाव लड़ा। 2017 में किसी कांग्रेसी ने चुनाव तो नहीं लड़ा लेकिन जिलाध्यक्ष सहित सात महत्वपूर्ण नेताओं ने चुनाव के दौरान ही भाजपा का दामन थाम लिया।
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दो बार विधायक रह चुके हेमेश खर्कवाल को भले ही आठ नेता चुनौती दे रहे हैं, लेकिन सूत्र बताते हैं कि वे अब भी सबसे मजबूत हैं। पांचवीं बार भी उन्हें हीर प्रत्याशी बनाया जाए तो हैरत नहीं होगी। संवाद
कांग्रेस के बागी प्रत्याशी:
2002: मदन सिंह महराना (जिले के पहले जिला पंचायत अध्यक्ष रहे) और विमला सजवाण (कांग्रेस की वरिष्ठ नेता)।
2007: बहादुर सिंह पाटनी (खटीमा के ब्लॅक प्रमुख व तत्कालीन जिला पंचायत उपाध्यक्ष) और राजेंद्र कुमार (हेमेश खर्कवाल के करीबी रहे)।
2012: हर्षवर्धन रावत (टिकट नहीं मिलने से नाराज हो उक्रांद पी में शामिल हो चुनाव लड़ा)।
2017: पहली बार कोई बागी प्रत्याशी नहीं, लेकिन तत्कालीन जिलाध्यक्ष सहित सात महत्वपूर्ण नेता पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हुए।
पांच साल पहले चुनाव के दौरान इन नेताओं ने छोड़ी थी पार्टी
तत्कालीन कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहन राम, एससी-एसटी प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष भरत राम, युवक कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष और चंपावत के पूर्व ब्लॉक प्रमुख बहादुर फर्त्याल, भेषज संघ के पूर्व अध्यक्ष सज्जन वर्मा, पूर्व महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष विमला सजवाण और टनकपुर के मंडल अध्यक्ष याकूब अंसारी।
इन नेताओं ने की है टिकट की दावेदारी
1.महेेंद्र सिंह माहरा : पूर्व कैबिनेट मंत्री और दो बार लोहाघाट से विधायक रहे। राज्य बनने से पूर्व पिथौरागढ़ से भी दो बार विधायक रह चुके हैं। 2012 में विधानसभा सीट हारने के बाद राज्यसभा भेजा गया।
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2.निर्मला गहतोड़ी : एक दशक तक जिलाध्यक्ष रहने के अलावा पूर्व दर्जा मंत्री रह चुकीं हैं।
3.उमेश खर्कवाल : बीडीसी सदस्य और पूर्व पीसीसी सदस्य।
4.हरगोविंद बोहरा : सेवादल के प्रदेश सचिव, 2002 में लोहाघाट से निर्दलीय चुनाव लड़ चुके।
5.सूरज प्रहरी : युवक कांग्रेस जिलाध्यक्ष, नामित सभासद रह चुके हैं।
6.बहादुर सिंह पाटनी : खटीमा में ब्लॉक प्रमुख रहने के अलावा 2003 से 2008 तक जिला पंचायत उपाध्यक्ष रहे।
7.विमला सजवान : पूर्व जिला पंचायत सदस्य, कांग्रेस छोड़ 2017 में भाजपा में शामिल और नवंबर 2021 में फिर घर वापसी।
8.भूपेंद्र महर : जिला पंचायत सदस्य, दो माह पहले कांग्रेस में शामिल हुए हैं।
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