18वें दिन ऑलवेदर सड़क को हल्के और भारी वाहनों के लिए कुछ घंटे खोलकर यातायात सुचारू किया गया। इस दौरान करीब 250 से अधिक वाहनों को टनकपुर से चंपावत और चंपावत से टनकपुर की ओर भेजा गया। इससे लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली, लेकिन वाहनों की आवाजाही से बार-बार सड़क धंसने से दिक्कतें आ रही है। इसके चलते शाम करीब छह बजे फिर से अधिकारियों ने सुरक्षा के चलते सड़क यातायात के लिए बंद कर दी।
रविवार को ऑलवेदर सड़क को स्वाला डेंजर जोन में कंक्रीट का रैंप बनाकर यातायात के लिए करीब एक बजे खोला गया। इस दौरान भारी वाहनों के गुजरने से रैंप धंस गया। इसके बाद कार्यदायी संस्था ने पत्थर डालकर उसे समतल किया और वाहनों की आवाजाही कराई। कई बार भारी वाहन मिट्टी धंसने के कारण वाहन फंस गए। ऐसे में मशीनों की मदद से धक्का लगाकर वाहनों को आगे बढ़ाया गया। स्वाला डेंजर जोन में करीब 25 मीटर का क्षेत्र संवेदनशील है। इस क्षेत्र में पहाड़ी से लगातार पानी गिरने से सड़क पर कीचड़ हो रहा है जिससे कई बार वाहन भी फंस गए।
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सावधानी से कराई जाए वाहनाें की आवाजाही : रावत
मुख्यमंत्री के सचिव और कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने ऑलवेदर सड़क के डेंजर जोन स्वाला का निरीक्षण किया। उन्होंने भू-धंसाव के स्थायी समाधान के लिए तैयार किए जा रहे प्रस्तावों के बारे में एनएच और कंसल्टेंसी एजेंसी टीएचडीसी के अधिकारियों से जानकारी ली। कमिश्नर ने कहा कि वाहनों का आवागमन सावधानी और सुरक्षा के बीच कराया जाए। रविवार को मुख्यमंत्री के सचिव रावत ने कहा कि टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच पूर्व से ही संवेदनशील था। पिछले दिनों हुई बारिश में मलबा आने से यह मार्ग अति संवेदनशील हो गया। इस मार्ग पर स्वाला के किमी 106-300 में सड़क भी धंस रही है। कहा कि पहाड़ी से लगातार मलबा गिर रहा है और जल रिसाव के चलते यह पहाड़ी लगातार संवेदनशील होती जा रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षात्मक कार्य में यह मार्ग पहले से चयनित था, इसके स्थायी समाधान के लिए प्लान तैयार किया गया है।
कहा कि शीघ्र ही पहाड़ी के ऊपरी क्षेत्र और सड़क के नीचे ट्रीटमेंट के कार्य किए जाएंगे। इस मार्ग को स्थिर करने के लिए ढाल को घटाया जाएगा। मार्ग को छोटे और बड़े वाहनों के लिए खोल दिया गया है, लेकिन इस मार्ग में लगातार निगरानी जारी रहेगी। डीएम नवनीत पांडे ने सचिव को पहाड़ी के स्थायी ट्रीटमेंट कार्यों के बारे में जानकारी दी। एनएच के मुख्य अभियंता दयानंद ने बताया कि स्वाला एक सक्रिय स्लाइड जोन है। इसके स्थायी समाधान के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। विगत दिनों हुई वर्षा से पहाड़ी में जगह जगह हो रहे जल रिसाव के कारण 25 मीटर के हिस्से में भू-धंसाव हुआ। रातों रात रैंप बनाकर भारी वाहनों की आवाजाही कराई गई। ट्रायल सफल रहा है। बताया कि लंबे समय के लिए पहाड़ी के शीर्ष पर जहां पहाड़ी से मलबा आ रहा है। वहां जेसीबी और लोडर से ट्रीटमेंट किया जा रहा है।
साथ ही एचटीडीसी कंपनी की टीम के साथ समन्वय कर स्थायी मार्ग तैयार करने का कार्य किया जा रहा है। पहाड़ी के स्थायी समाधान के लिए स्थायी ट्रीटमेंट के लिए एंकरिंग कर नौ बैंचेज बनाए जाएंगे। इस दौरान कंसल्टेंट्स कंपनी टीएचडीसी अपर महाप्रबंधक सिविल (डिजाइन) नीरज अग्रवाल, मुख्य अभियंता लोनिवि अल्मोड़ा राजेंद्र सिंह, मुख्य अभियंता सिंचाई संजय शुक्ल, एडीएम हेमंत कुमार वर्मा, अधीक्षण अभियंता विकास श्रीवास्तव अधीक्षण अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग अनिल पांगती, एसडीएम सौरभ असवाल, सीओ वंदना वर्मा आदि मौजूद रहे।
वाहनों की आवाजाही को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
ऑलवेदर सड़क पर वाहनों की आवाजाही को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। इससे हर कोई इसे लेकर सवाल कर रहा है। सोशल मीडिया पर बंद ऑलवेदर सड़क की चर्चा सुर्खियों में है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों को आवागमन की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पूरन कठायत ने कहा कि ऑलवेदर सड़क पर आवाजाही की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। हर रोज सुबह सड़क खोली जा रही है। फिर बंद की जा रही है।
ऑलवेदर सड़क पिथौरागढ़ और चंपावत के लोगों की लाइफ लाइन है। स्पष्ट जानकारी नहीं होने से हर कोई असमंजस में है। इसे लेकर प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि वह अपना आवागमन कर सकें। करोड़ों का नुकसान पिथौरागढ़ और चंपावत के लोगों को हुआ है।