नमामि गंगे की टीम ने किया श्रीनगर से जोशीमठ तक डंपिंग जोन का ऑडिट
कहीं भी व्यवस्थित ढंग से नहीं किया गया था कूड़ा डंप
गोपेश्वर। चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित शहरी क्षेत्रों में कूड़ा निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने से नगर का कूड़ा हाईवे किनारे डंप किया जा रहा है। इससे अलकनंदा भी दूषित हो रही है। हाल ही में नमामि गंगे परियोजना निदेशक की ओर से कराए गए ऑडिट के बाद शहरी विकास निदेशालय की ओर से श्रीनगर से लेकर जोशीमठ तक के नगर पालिकाओं को अनियमित ढंग से किए जा रहे कूड़ा डंपिंग पर सात मई तक जवाब मांगा गया है।
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, नमामि गंगे की टीम की ओर से जगह-जगह नगर क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट पर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गौचर, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग, चमोली, पीपलकोटी और जोशीमठ नगर पालिका परिषद की ओर से ठोस अपशिष्ट का उचित प्रबंधन नहीं किया गया है।
कूड़े का निस्तारण अलकनंदा नदी के ठीक ऊपर से किया जा रहा है। शहरी विकास निदेशालय की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि नमामि गंगे की ओर से बीते 10 अप्रैल तक किए गए ऑडिट में कहा गया कि शहर के कूड़े को पहाड़ी की ढलान पर निस्तारित किया जा रहा है और जलाया जा रहा है। पूर्व में कई बार कहा गया है कि कूड़े को किसी भी सूरत में डंप न किया जाए और न ही जलाया जाए।
कूड़ा जलाए जाने की जानकारी होने पर 5000 से 25000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जाए। पहाड़ी की ढलान में कूड़ा निस्तारित करना घोर आपत्तिजनक है और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 शासनादेश का उल्लंघन है। शहरी विकास निदेशालय के अपर निदेशक डॉ. ललित नारायण मिश्र ने बदरीनाथ नगर पंचायत को छोड़कर श्रीनगर से जोशीमठ तक के नगर पंचायत व नगर पालिका के अधिशासी अधिकारियों से सात मई तक जवाब मांगा है।