मुख्यालय में सीटू की ओर से श्रमिकों की दशा व दिशा विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस दौरान सीटू से जुड़े विभिन्न संगठनों के कर्मचारियों ने शहर में रैली निकालकर प्रदेश व केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।
रविवार को रामलीला मैदान में सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन) की ओर से परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस मौके पर सीटू के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों श्रमिक विरोधी हैं। उत्तराखंड में भी संविदा, आउटसोर्स व ठेका प्रथा के माध्यम से कर्मचारियों के भविष्य को अंधेरे में डाला जा रहा है। कहा कि संविदा प्रथा को तत्काल बंद कर नियमित व स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए। भोजनमाता कामगार यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष रोशनी बिष्ट ने कहा कि श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए हमें एकजुट होना होगा। इसके बाद रामलीला मैदान से रैली निकाली गई और केंद्र व प्रदेश सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया। सीटू ने श्रमिक विरोधी कानून को वापस लेने, स्थायी रोजगार देने सहित कई समस्याओं के समाधान की मांग की। इस दौरान भोजनमाता, आंगनबाड़ी, डाक, पावर कॉरपोरेशन यूनियन से जुड़े कर्मचारी शामिल रहे। इस अवसर पर राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली मंच के मंडल अध्यक्ष जसपाल रावत, टीपी पोखरियाल, नरेश नौडियाल, उर्मिला चमोली, पीबी नेगी आदि मौजूद रहे।
‘मजदूरों को सुलभ न्याय देना ही उद्देश्य’
विश्व मजदूर दिवस पर ग्वालदम, तलवाड़ी, कुलसारी व थराली में कार्यक्रम हुए। नगर पंचायत सभागार में जिला विधिक सेवा समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष न्यायिक मजिस्ट्रेट शिव सिंह ने कहा कि नालसा (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए विधिक सेवा योजना के तहत निशुल्क न्याय प्रदान करती है। सभी को सुलभ न्याय मिलना हमारा उद्देश्य होना चाहिए। समय-समय पर नालसा निशुल्क न्यायिक शिविरों का आयोजन करती है। जिसमें असंगठित क्षेत्र के गरीब मजदूरों को निशुल्क सेवा प्रदान की जाती है। साथ ही जागरूकता शिविरों के माध्यम से मजदूरों के अधिकारों के बारे में भी बताया जाता है। इस अवसर पर तहसीलदार प्रमोद नेगी, एडवोकेट हरेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, जय सिंह, नगर पंचायत अध्यक्ष दीपा भारती, थानाध्यक्ष बृजमोहन सिंह, जगमोहन सिंह और अधिशासी अधिकारी टंकार कौशल मौजूद थे। संवाद