ओडर गांव की ट्रॉली खराब होने से डेढ़ घंटे से फंसी चार महिलाएं।
- फोटो : KARNPRYAG
ओडर गांव में पिंडर नदी पर लगाई गई ट्रॉली खराब होने से ओडर गांव की चार महिलाएं नदी के ऊपर ट्रॉली में ढाई घंटे तक फंसी रहीं। ग्रामीणों की ओर से सूचना देने पर लोनिवि का कोई कर्मचारी जब मौके पर नहीं पहुंचा तो युवाओं ने रस्सी डालकर ट्रॉली में फंसी महिलाओं को काफी मशक्कत के बाद निकाला। ट्रॉली खराब होने से कई ग्रामीण व खेती करने जा रही महिलाएं को बोरागड़ के रास्ते पैदल घर जाना पड़ा।
पिंडर नदी के ऊपर बना ओडर झूला पूल वर्ष 2013 की आपदा में बह गया था। तब से यहां ग्रामीणों के आने जाने के लिए लोनिवि ने हाइड्रोलिक ट्रॉली लगाई है, लेकिन ट्रॉली की तकनीकी देखरेख न होने से लोग परेशान हैं। ओडर के ग्रामीणों की पिंडर नदी के दोनों ओर खेती है। खेती करने यहां के लोग इसी ट्रॉली से आवाजाही करते हैं। बृहस्पतिवार को ओडर गांव की महिलाओं को खेती करने सिलंगी जाना था। सुबह साढ़े आठ बजे कमला देवी, मदुली देवी, मुन्नी देवी व मीना देवी ट्रॉली में बैठी लेकिन ठीक नदी के बीच पहुंचने के बाद अचानक ट्रॉली खराब हो गई। चारों महिलाएं बीच में ही फंस गईं। लोनिवि ईई का कार्यालय यहां से 22 किलोमीटर दूर पर है। किसी कर्मचारी के यहां न होने पर स्थानीय लोगों ने रस्सी महिलाओं की ओर फेंकी और ट्रॉली को अपनी ओर खींचा। इस तरह चारों महिलाओं को वहां से निकाला गया। ओडर के बीडीसी मेंबर पान सिंह, नरेंद्र बिष्ट व राजेंद्र सिंह ने कहा कि ट्रॉली की स्थिति खराब है। रस्से पुराने हो गए हैं। ग्रामीणों ने सरकार से यहां पर झूला पुल बनाने की मांग की।
कोट
ओडर गांव में ट्रॉली में फंसी महिलाओं की सूचना लोनिवि के जेई व एई को देने व इस बारे में जानकारी चाही गई। लेकिन दोनों ने फोन रिसीव नहीं किया। विभाग को ट्रॉली की नियमित देखरेख व संचालन के लिए आदेश कर दिया गया है। - सुधीर कुमार, एसडीएम।
कई बार हो चुकी है खराब
ओडर ट्रॉली कई बार खराब हुई। 24 मई 2021 को ट्रॉली के संचालन में देरी होने से उल्टी दस्त से बीमार गांव के सात साल की एक बच्ची की समय पर अस्पताल नहीं पहुंचनेेे से मौत हो गई थी। बीडीसी मेंबर पान सिंह ने बताया कि ट्रॉली खराब होने से गांव के लोगों को तीन किलोमीटर आना व तीन जाना कुल छह किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।