थराली के चिड़िगा मल्ला के ग्रामीणों ने बनाया लकड़ी का अस्थाई पुल।
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मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली को गांव तक लाने के लिए चिड़िगा मल्ला के ग्रामीणों ने दो दिन में ही गदेरे पर लकड़ी की अस्थायी पुलिया का निर्माण कर दिया। अब माता की डोली इसी पुलिया से गांव पहुंचेगी। चिड़िगा मल्ला के ग्रामीणों ने ग्वाई गदेरे पर दो मीटर चौड़ी और आठ मीटर लंबी पुलिया का निर्माण किया है।
चिड़िगा मल्ला गांव में ग्वाई गदेरे पर बनी पुलिया वर्ष 2013 की आपदा में बह गई थी। तब से यहां ग्रामीण गदेरे से ही आवाजाही कर रहे थे। बरसात में पानी बढ़ने पर ग्रामीणों को आवाजाही के लिए यहां पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है।
रमेश, उमेश, सुरेश, जयबीर ने कहा कि कई बार प्रशासन से गदेरे पर पुलिया बनाने के लिए गुहार लगाई, लेकिन जब किसी ने नहीं सुनी और मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली शुक्रवार को चिड़िगा मल्ला गांव आने की सूचना मिली तो ग्रामीणों ने बैठक बुलाई और स्वयं पुलिया बनाने का निर्णय लिया। गदेरे पर पुलिया बनाने के लिए गांव के युवाओं ने तीन किमी दूर सरकोट गांव से कंधों पर बल्लियां और तख्ते लादकर निर्माण स्थल पर पहुंचाया, जिसके बाद गांव के युवा मिस्त्रियों ने इस पुलिया का निर्माण किया। इसी पुलिया के जरिए मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली बिना कष्ट के गांव के चौक तक पहुंचेगी। साथ ही अब सरकोट, नंदकेशरी और देवाल जाने वाले छात्र-छात्राओं और लोगों को आवाजाही में आसानी होगी। युवाओं के प्रयास को देखकर आसपास के गांव के ग्रामीणों ने उनकी सराहना की। कहा कि अब गांव में देवी की डोली का इंतजार है।