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अहंकारी रावण ने हिलाया कैलाश पर्वत

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संयुक्त रामलीला मंच और व्यापार संघ की संयुक्त पहल पर गोपेश्वर में रामलीला का मंचन शुरू हो गया है। इस दौरान रावण अपने तपोबल से कैलाश पर्वत को हिला देता है। रामलीला का शुभारंभ वयोवृद्ध व्यापारी बीडी तिवारी ने किया। उन्होंने दर्शकों को भगवान श्रीराम के पदचिह्नों पर चलने का आह्वान किया।
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पहले दिन की रामलीला में लंकापति रावण, कुंभकरण और विभीषण ब्रह्मदेव की तपस्या करते हैं। उनकी तपस्या से खुश होकर ब्रह्मदेव रावण को अमर रहने, कुंभकरण को छह माह की निंद्रा और विभीषण को भगवान की भक्ति में लीन रहने का वरदान देते हैं। वरदान मिलते ही अहंकारी रावण अपने तपोबल से कैलाश पर्वत को हिलाता है, जिससे नाराज भगवान शिव उसे श्राप देते हैं और तांडव करने लगते हैं। रावण के उत्पात से दुखी देवतागण भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं। भगवान विष्णु उन्हें त्रेता युग में राम अवतार लेकर रावण के विनाश का आश्वासन देते हैं। इस मौके पर संयुक्त रामलीला मंचन के अध्यक्ष अंकोला पुरोहित, महामंत्री आयुष चौहान, उपाध्यक्ष जगदीश पोखरियाल, अनूप खंडूरी, सुनील चौहान, पीयूष विश्नोई, हेम दरमोड़ा, प्रेम पुजारी, राकेश मैठाणी, कमल राणा और जगमोहन आदि मौजूद थे।
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