जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनाई सजा
गर्भवती होने पर आरोपी ने मना कर दिया था शादी से, पीड़िता ने दर्ज कराया था मुकदमा
शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म करने के आरोप में जिला एवं सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने एक व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड में से 45 हजार रुपये पीड़िता को देने व पांच हजार रुपये राजकोष में जमा करने के आदेश किए हैं। जुर्माना अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। आरोपी अभी तक जमानत पर था और कोर्ट से सजा मिलने के बाद उसे पुरसाड़ी जेल भेज दिया गया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कुलदीप बर्तवाल ने बताया कि अक्तूबर 2015 में गैरसैंण क्षेत्र के एक गांव की युवती ने राजस्व पटवारी को तहरीर दी थी। बताया था कि गांव के ही एक युवक ने नवंबर 2014 में उसे शादी का झांसा दिया और फिर उसके साथ लगातार संबंध बनाए। गर्भवती होने पर आरोपी ने उससे शादी करने से मना कर दिया। उसके बाद पीड़िता ने राजस्व क्षेत्र में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया और डीएम के आदेश पर मामला रेगुलर पुलिस को सौंपा गया। इसके बाद 30 जनवरी 2016 को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आरोपी को कोर्ट से जमानत मिल गई। विवेचना के दौरान मां, बच्चे और आरोपी का डीएनए टेस्ट कराया गया जिसमें बच्चे का पिता आरोपी को बताया गया। शुक्रवार को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म का दोषी पाते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।