विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना निर्माण की जद में आ रहे हाट गांव के 16 मकानों को टीएचडीसी ने बुधवार को भारी पुलिस फोर्स और प्रशासन की मौजूदगी में जेसीबी मशीनों के जरिये ध्वस्त कर दिया। गांव में ध्वस्तीकरण का विरोध कर रहे चार जनप्रतिनिधियों के साथ ही तीन महिलाओं को पुलिस पकड़कर गोपेश्वर ले गई।
टीएचडीसी की 444 मेगावाट वाली विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के लिए हाट गांव का विस्थापन होना है। गांव के सात परिवार कई मांगों को लेकर विस्थापन से इंकार कर रहे थे। बुधवार सुबह करीब साढ़े सात बजे टीएचडीसी के अधिकारी पुलिस फोर्स के साथ हाट गांव पहुंचे। संयुक्त मजिस्ट्रेट/एसडीएम अभिनव शाह व एक अन्य मजिस्ट्रेट मौके पर मौजूद रहे। ग्रामीणों को इस अभियान की कोई खबर नहीं थी। सुबह लोग उठे तो गांव में पुलिस देख खलबली मच गई। ग्रामीणों ने विरोध करना शुरू कर दिया। विरोध कर रहे ग्राम प्रधान राजेंद्र हटवाल, दशोली ब्लॉक के ज्येष्ठ उपप्रमुख पंकज हटवाल, मुकेश गैरोला व उनकी पत्नी प्रभा देवी, नव युवक मंगल दल के अध्यक्ष अमित गैरोला और कृष्ण चंद के साथ ही दो महिलाओं को पुलिस गोपेश्वर थाने ले आई। उन्होंने गोपेश्वर में पुलिस के ऑफिसर क्लब और मनोरंजन हॉल में रखा गया।
इसके बाद कंपनी की दो जेसीबी मशीनों ने मकानों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। पूरे दिन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई चलती रही। कुछ लोग पहले ही अपना मकान तोड़कर विस्थापित हो चुके हैं। जबकि मुकेश गैरोला, राजेंद्र हटवाल, नर्वदा देवी, दीपक गैरोला, भगवती हटवाल, नमिता देवी और गुप्ता प्रसाद पंत ने न टीएचडीसी से मुआवजा लिया और न ही घरों को छोड़ा था। उनके मकान जबरन तोड़े गए, जबकि 10 मकान पहले ही खाली हो चुके थे।
पुलिस और प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों का सामान जबरन बाहर निकलवाया। उसके बाद घरों को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस कार्रवाई के दौरान नायब तहसीलदार धीरज राणा, टीएचडीसी के जीएम गणेश भट्ट, डीजीएम जीएस बिष्ट, एजीएम अनिरुद्ध विश्नोई, एजीएम संदीप गुप्ता भी मौजूद थे।
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छावनी में तब्दील रहा गांव
ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए प्रशासन और टीएचडीसी की टीम पूरी तैयारी के साथ गांव पहुंची थी। गांव में छावनी में तब्दील कर दिया गया था। किसी भी व्यक्ति को धोबीघाट से आगे नहीं जाने दिया गया। जो भी विरोध कर रहा था उसे पुलिस पकड़कर ले जा रही थी। 20 अगस्त को भी प्रशासन की टीम गांव पहुंची थी, लेकिन तब ग्रामीणों ने विरोध करते हुए आत्मदाह का प्रयास किया था। जिसके बाद टीम को लौटना पड़ा था।
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श्राद्ध की तैयारी कर रहे थे मुकेश
ध्वस्तीकरण से प्रभावित मुकेश गैरोला ने बताया कि बुधवार को उनकी दादी का श्राद्ध था। वे पितृ तर्पण की तैयारी कर रहे थे। तभी पुलिस की मौजूदगी में सामान बाहर कर दिया गया। उधर, टीएचडीसी ने फिलहाल सियासैंण स्थित कंपनी के टिन सेडों में प्रभावित लोगों के रहने की व्यवस्था की है।
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- सड़क, मंदिर सौंदर्यीकरण, आम रास्ते, पानी, बिजली सहित हमारी किसी मांग पर परियोजना कंपनी ने कार्रवाई नहीं की। प्रशासन की ओर से भी कोई मदद नहीं मिली। बिना सूचना और अनुमति के बिना मकान तोड़ दिए गए। यह सरासर उत्पीड़न है। हम इस एकतरफा कार्रवाई का विरोध करते हैं। -राजेंद्र हटवाल, ग्राम प्रधान हाट।