बागेश्वर, पिथौरागढ़ जिले को जोड़ने वाले प्राचीन ट्रेल दर्रे को पार करने के लिए छह पर्वतारोहियों का दल यहां से रवाना हो गया है। इस दल में थराली के विजय रौतेला, प्रमोद भंडारी, मयंक भंडारी, हरिद्वार के विनीत सैनी, मुंबई के देवाशीष डिमरी, विश्वनाथ डे शामिल हैं। यह दल बागेश्वर से रवाना हो चुका है।
शुक्रवार को पिंडारी बेस कैंप से निकलेगा। यह दल दो जून को दर्रा पार करके पिथौरागढ़ जिले में नंदा देवी पूर्वी के बेस कैंप से होते हुए नसपुन, पट्टी, मारतोली, बोगड्यार की ट्रेकिंग करेगा। ट्रेल पास से पूर्व में भारत, तिब्बत के मध्य व्यापार भी होता था। अत्यधिक कठिन दर्रा होने के कारण बाद में इसे छोड़ दिया गया।
तब से यह पर्वतारोहियों की जिज्ञासा का केंद्र बन गया। 1830 में कपकोट के सूपी निवासी मल्खा सिंह बूड़ा ने इस दर्रे को पार किया था। ब्रिटिश काल में जार्ज विलियम ट्रेल ने इसे खोलने के मकसद से यहां की यात्रा की थी, इसके बाद दर्रे का नाम ट्रेल पास हो गया।
पर्वतारोहियों के अनुसार मल्खा सिंह के बाद 12 दल इस दर्रे को पार कर चुके हैं। 5312 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस दर्रे की यात्रा काफी जोखिम भरी है।