फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बारिश से रास्ता बंद होने के बावजूद उम्मीद और हौसला नहीं छोड़ा

विज्ञापन
बागेश्वर के द्वाली में बनाए गए अस्थायी पुल से आने की तैयारी करते ट्रैकर। विज्ञप्ति - फोटो : BAGESHWAR
विज्ञापन
बागेश्वर। बुरे वक्त में बुलंद हौसला और उम्मीद की किरण बनाए रखने से हर मुश्किल से पार पाया जा सकता है। यह बात अमेरिकी परिवार पर सच साबित होती है। भारी बारिश के बीच अमेरिकी दंपती और उनके दो बच्चे पिंडारी ग्लेशियर के रास्ते में पड़ने वाले फुर्किया में फंस गए थे।
विज्ञापन

द्वाली में पुल बहने के बाद तत्काल वापस आने की भी उम्मीद नहीं थी। ऐसे में परिवार ने हौसला बनाए रखा और खुद को हर मुश्किलों से लड़ने के लिए तैयार किया। उनका धैर्य काम आया और प्रशासन की मदद से परिवार आठ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकल आया है।
अमेरिका निवासी टिम, उनकी पत्नी लिज, बच्चे जेट और टाई पिंडारी घूमने आए थे। पिछले शुक्रवार को परिवार धाकुड़ी में रुका और शनिवार को द्वाली पहुंचा। द्वाली से रविवार को परिवार फुर्किया पहुंचा। सोमवार को परिवार का पिंडारी ग्लेशियर जाने का कार्यक्रम था लेकिन रविवार की शाम से ही बारिश होने लगी।
विज्ञापन

सोमवार सुबह भी भारी बारिश थी, परिवार ने बारिश के रुकने का इंतजार करने का फैसला किया, लेकिन सोमवार के पूरे दिन-रात और मंगलवार के दिन भारी बारिश होने से पिंडारी जाने का सपना चकनाचूर हो गया।
परिवार ने लौटने का फैसला लिया लेकिन द्वाली में पिंडर नदी पर बने अस्थायी पुल के बहने के कारण लौटना संभव नहीं था, जिसे देखकर परिवार मायूस होने लगा था, हालांकि प्रशासन को जानकारी मिलने के बाद पिंडर नदी में अस्थायी पुलिया बनाई और आखिरकार अन्य पर्यटकों के साथ टिम का परिवार सकुशल लौट आया।
परिवार के साथ दो अन्य अमेरिकी पर्यटकों को भी प्रशासन सकुशल निकाल लाया है। अमेरिकी पर्यटकों ने कहा कि वे पिंडारी की यात्रा भविष्य में जरूर करेंगे, लेकिन अब गर्मियों के सीजन में ही ट्रैकिंग पर आएंगे। संवाद
रोमांच और खतरे का मिश्रण रहा टूर
बागेश्वर। द्वाली से सकुशल लौटने पर अमेरिकी परिवार के मुखिया टिम ने बताया कि पिंडारी ग्लेशियर का यह टूर रोमांच और खतरे से भरपूर रहा। कहा कि हर सफर में कुछ रोमांच और कुछ खतरा बना रहता है, लेकिन अच्छी बात यह है कि शासन और प्रशासन की मदद से वह और उनका परिवार सकुशल लौट आया है।
उम्मीद और हिम्मत आई काम
बागेश्वर। लिज ने बताया कि वह अपने पति और दोनों बेटों के साथ घूमने आई, लेकिन मौसम ने विपरीत हालात खड़े कर दिए। ऐसे वक्त में केवल उम्मीद और हिम्मत ही काम आई। बारिश ने डर के हालात खड़े कर दिए थे, लेकिन आखिरी वक्त तक उम्मीद बनाए रखने से हर मुश्किल आसान हो गई। अच्छी बात यह थी कि बारिश में फंसने के बावजूद उनके पास खाने का भरपूर सामान था। शासन और प्रशासन ने विशेष तौर पर सहयोग किया और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की।
लकड़ी के अस्थायी पुलों से पार की पिंडर नदी
बागेश्वर। लोनिवि ने पिंडर नदी में द्वाली के पास मानसून थमने के बाद लकड़ी के अस्थायी पुलों का निर्माण कराया था, भारी बारिश में पुल बह गए। इस कारण छह विदेशी पर्यटकों सहित 42 लोग द्वाली में फंस गए थे जिन्हें बाहर निकालने के लिए बड़े-बड़े लट्ठे डालकर अस्थायी पुलिया बनाई गई। इसकी मदद से पर्यटकों ने किसी तरह नदी पार की और द्वाली से लौट सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें