बागेश्वर। निर्माणाधीन पतियासार-भद्रतुंगा-झूनी मोटर मार्ग निर्माण के दौरान बोल्डर गिरने से क्षतिग्रस्त पैदल पुल तीन माह बीतने के बाद भी बन नहीं पाया है। ग्रामीण क्षतिग्रस्त पुल से खतरा उठाकर आवाजाही कर रहे हैं। पुल नहीं होने से गांव में निर्माण सामग्री नहीं पहुंच रही है। खच्चर चलाकर जीवन-यापन करने वालों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
मिखिला खलपट्टा गांव में 652 परिवार निवास करते हैं। भद्रतुंगा से गांव को जोड़ने का एकमात्र माध्यम सरयू नदी पर बना पैदल पुल है। 11 जून को निर्माणाधीन मोटर मार्ग से बोल्डर और मलबा गिरने के कारण पुल का एक अपरमेंट टूटा और पुल गिर गया। जिसके बाद से ग्रामीण क्षतिग्रस्त पुल से जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं।
भद्रतुंगा से मिखिला तोक की दूरी 1.50 और खलपट्टा तोक की 2.50 किमी है। गांव के लिए राशन और अन्य रोजमर्रा का सामान भद्रतुंगा से लेकर जाना पड़ता है। ग्रामीण खच्चरों की मदद से गांव तक जरूरी सामान ले जाते थे, लेकिन पुल टूटने के बाद से खच्चरों की आवाजाही ठप हो गई है। ग्रामीणों को सिर पर ढोकर सामान ले जाना पड़ रहा है।
ग्राम प्रधान दुर्गा देवी ने बताया कि पिछले तीन माह से गांव में हो रहे निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं। खच्चरों की आवाजाही बंद होने से भारी सामान गांव तक नहीं पहुंच रहा है। राशन की दिक्कत के साथ ही सीमेंट, सरिया, ईट आदि निर्माण सामग्री की भी किल्लत हो रही है। जिसके कारण कई लोगों के घर और अन्य निर्माण कार्य रुक गए हैं। कई बार विभाग और जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया गया लेकिन अब तक पुल बनाने की कवायद शुरूनहीं हो सकी है।
आवागमन को लगाई ट्रॉली भी मलबे से पटी
बागेश्वर। पुल टूटने के बाद विभाग ने ग्रामीणों की आवाजाही के लिए नदी पर ट्रॉली लगाई थी। कुछ दिन तक ट्रॉली का उपयोग हुआ, लेकिन निर्माणाधीन सड़क से गिरने वाले मलबे से ट्रॉली भी पट गई है। ट्रॉली तक जाने का रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया है।
पतियासार-झूनी निर्माणाधीन सड़क के कुछ हिस्से पर कठोर चट्टान की कटिंग होनी है। जल्द ही पुल का पुनर्निर्माण कर दिया जाएगा।
विशन लाल ईई वॉप्कोस बागेश्वर।