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सरयू घाटी के गांवों में तीन दिन से बिजली गुल

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बागेश्वर के दुलम गांव में भूस्खलन की चपेट में आया बिजली का पोल। विज्ञप्ति - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। कपकोट दुलम में बिजली का पोल भूस्खलन की चपेट में आने से क्षेत्र के 25 गांवों की बिजली तीन दिन से गुल है। बिजली नहीं होने से करीब तीन हजार की आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने ऊर्जा निगम से जल्द बिजली आपूर्ति सुचारु कराने की मांग की है।
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शुक्रवार की शाम कपकोट क्षेत्र में हुई भारी बारिश में दुलम गांव के समीप से सरयू घाटी के गांवों के लिए गुजर रही बिजली लाइन का पोल भूस्खलन की चपेट में आ गया। भारी भूस्खलन से पोल हवा में झूलने लगा। क्षेत्रवासियों ने इसकी सूचना ऊर्जा निगम को दी। तत्काल विभाग ने क्षेत्र के गांवों की बिजली सप्लाई बंद कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि निगम ने बिजली को काट दी लेकिन लाइन को दुरुस्त नहीं किया गया है। बिजली गुल होने से सरयू घाटी के दुलम, बांसे, गांसी, सूपी, सौंग, मुनार, तरसाल, पतियासार, झूनी, खलझूनी, सुमगढ़ आदि गांवों की बिजली आपूर्ति बाधित है।
दुलम गांव में सड़क कटान के कारण हुए भूस्खलन की चपेट में आने से एक पोल गिर गया था। पोल को बदलने के लिए काम शुरू कर दिया है। जल्द ही बिजली आपूर्ति सुचारु करा दी जाएगी।
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एसएस भंडारी, एसडीओ ऊर्जा निगम, कपकोट
खतरा बने तुन के पेड़ को कटवाने की मांग
कांडा (बागेश्वर)। कांडा के पोखरी में तुन का पेड़ खतरा बना हुआ है। खराब मौसम में तुन के पेड़ में अक्सर बिजली गिरती है। पेड़ घनी आबादी में होने की वजह से बिजली गिरने पर बिजली के उपकरण फुंक जाते हैं। रविवार की रात भी बिजली गिरने से उपकरण फुंके। गांव के लोगों का कहना है कि तुन के पेड़ को कटवाने की मांग तहसील प्रशासन से भी की जा चुकी है। पेड़ कटवाने का आश्वासन भी दिया गया लेकिन पेड़ नहीं कटवाया गया। पोखरी निवासी हरीश चंदोला, नंदा बल्लभ, मोहन चंद्र, भरत चंदोला, उमा देवी का कहना है कि तुन के पेड़ पर बिजली गिरने से जनहानि, पशुहानि होती है तो उसके लिए संबंधित विभाग और प्रशासन जिम्मेदार रहेगा।
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