बागेश्वर। खाती गांव (पिंडर घाटी) में स्वास्थ्य सेवा चरमरा गई है। सरकार से करार के आधार पर हंस फाउंडेशन खाती गांव अस्पताल का संचालन करता है। अस्पताल में नवंबर 2021 से एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। डॉक्टर न होने से अस्पताल में महिलाओं के प्रसव नहीं हो पा रहे हैं। अस्पताल में लैब तकनीशियन का पद भी खाली है। इस वजह से विभिन्न प्रकार की जांच नहीं हो पा रही हैं।
हंस फाउंडेशन ने सरकार से हुए करार के आधार पर वर्ष 2018 में हिमालय की तलहटी पर बसे खाती गांव में अस्पताल खोला। अस्पताल में एमबीबीएस, आयुर्वेदिक डॉक्टर, फार्मासिस्ट, लैब तकनीशियन, नर्स की तैनाती की गई। अस्पताल खुलने से जिला मुख्यालय से 70 किमी की दूरी पर स्थित खातीगांव के लोगों को घर पर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिलने लगा। अस्पताल में महिलाओं के सुरक्षित प्रसव होने लगे। खून, मूत्र समेत नौ प्रकार की जांचें अस्पताल में ही होने लगी। अस्पताल से खाती गांव के साथ ही आसपास के इलाके के लोगों को घर पर स्वास्थ्य सुविधा मिल रही थी। निशुल्क इलाज और दवा मिलती थी।
21 नवंबर को अस्पताल में तैनात डॉक्टर ने इस्तीफा दे दिया था। वहां वर्तमान में केवल आयुष डॉक्टर तैनात है। डॉक्टर और लैब तकनीशियन न होने से खाती गांव के लोग परेशान हो गए हैं। उन लोगों को 46 किमी दूर कपकोट या 70 किमी दूर जिला मुख्यालय आना पड़ रहा है।
खाती में संचालित अस्पताल से लोगों को काफी लाभ मिल रहा था। अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर न होने से लोग दिक्कत में हैं। जल्द से जल्द एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए।
तारा सिंह दानू निवासी खाती
खाती के अस्पताल में डॉक्टर न होने से प्रसव नहीं हो पा रहे हैं। लोगों की खून, बलगम, मूत्र की जांच नहीं हो पा रही है। अस्पताल की अव्यवस्थाओं को दूर किया जाना चाहिए।
दयाल आर्या निवासी खाती
अस्पताल को हंस की सहयोगी संस्था करुणा ट्रस्ट संचालित करती है। करुणा ट्रस्ट अस्पताल को आगामी 31 मार्च तक संचालित करेगी। 21 अगस्त 2021 से पहले अस्पताल हंस के दिल्ली कार्यालय से संचालित होता था। अब देहरादून से संचालित किया जा रहा है। व्यवस्था बदलने से फैसला लेने में देरी हो रही है। प्रबंधन के सामने खाती अस्पताल का मामला प्राथमिकता के साथ रखा जा रहा है। मार्च के बाद अस्पताल के व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
एनबी अवस्थी कंसलटेंट हंस फाउंडेशन (समेकित ग्राम विकास परियोजना पिंडर घाटी)