मकर संक्रांति के लिए सजा भगवान बागनाथ का प्रवेश द्वार। विज्ञप्ति
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बागेश्वर। मकर संक्रांति पर धार्मिक आयोजन को लेकर बाबा बागनाथ की नगरी तैयार हो गई है। प्रसिद्ध बागनाथ धाम को फूलों से सजाया गया है। सरयू घाट और तटों पर सफाई और रंगरोगन का काम पूरा हो गया है। बागनाथ मंदिर से नुमाइशखेत को जोड़ने वाला पैदल पुल भी बनकर तैयार हो गया है। शुक्रवार को सूर्य के उत्तरायण होने के मौके पर त्रिमाघी पर्व की शुरुआत हो जाएगी। तीन दिन तक श्रद्धालु स्नान, दान और पूजा पाठ आदि धार्मिक आयोजन करेंगे।
जिले में मकर संक्रांति से ऐतिहासिक उत्तरायणी मेले की शुरुआत होती थी, लेकिन पिछले वर्ष से कोरोना महामारी के चलते मेले का आयोजन केवल धार्मिक स्वरूप तक सिमटकर रह गया है। इस वर्ष भी केवल धार्मिक आयोजनों की अनुमति है। इसे देखते हुए सरयू नदी तट और बागनाथ मंदिर की सजावट पर विशेष ध्यान दिया गया है। मंदिर और प्रवेश द्वार की भव्य सजावट की गई है। सरयू नदी के बीचोंबीच स्थित शिला पर अंकित भगवान शिव के चित्र को नए स्वरूप में रंगा गया है। जो आर्कषण का केंद्र बना हुआ है। बागनाथ मंदिर से नुमाइशखेत के लिए बनने वाले पैदल पुल का काम मेले के चलते जोरशोर से किया गया। इस पुल से स्नान और पूजा-पाठ चौरासी आदि क्षेत्रों से आने वाले आवाजाही कर सकेंगे। बागनाथ मंदिर के पास बनी भगवान शिव की मूर्ति को रंगने का काम भी जोरशोर से चला। कोरोना महामारी के चलते इस बार लोगों को सांस्कृतिक, व्यापारिक और राजनीतिक गतिविधियां देखने को नहीं मिलेंगी, लेकिन भगवान शिव के भक्त मकर संक्रांति पर कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए पूजा-पाठ और स्नान-दान कर पुण्य अर्जित कर सकेंगे।