बागेश्वर में दोनों पुत्रों और पर्वतारोही केशव भट्ट के साथ क्रिकेट कमेंटेटर चारू शर्मा
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। भारतीय क्रिकेट कमेंटेटर चारु शर्मा की पिंडारी ग्लेशियर की यात्रा की हसरत 47 साल बाद एक बार फिर पूरी नहीं हुई। खराब मौसम के कारण पिंडारी ग्लेशियर के पास पहुंचने के बाद भी उन्हें लौटना पड़ा। इस बार उनके साथ उनके दोनों बेटे भी थे। वह 47 वर्ष पूर्व पिंडारी की यात्रा पर आए थे, तब भी यात्रा पूरी नहीं कर सके थे।
बंगलुरू निवासी कमेंटेटर चारु शर्मा अपने दोनों बेटों देवेश्वर और ध्रुव के साथ 17 अक्तूबर को पिंडारी की यात्रा पर निकले थे। 17 को ही वे लोग खातीगांव पहुंच गए थे। खातीगांव में उन्हें हाई अलर्ट की जानकारी मिली। इसके बाद वे लोग यहीं रुक गए। 17, 18 और 19 अक्तूबर को बारिश के कारण खातीगांव से बाहर नहीं निकल सके। 20 अक्तूबर को उन्होंने लोकल में एक ट्रैक किया। 21 अक्तूबर को सुंदरढूंगा घाटी में जातोली के ट्रैक पर गए। 20 अक्तूबर को धाकुड़ी को निकले। वहां लोनिवि के आवासगृह में रुके। यहीं उन्हें सुंदरढूंगा में ट्रैकरों और पोर्टरों के फंसने की जानकारी मिली। 23 अक्तूबर की सुबह पिंडारी ट्रैकिंग रूट के धाकुड़ी टॉप गए और फिर वापस आ गए।
धाकुड़ी से लौटे शर्मा ने बागेश्वर में प्रसिद्ध पर्वतारोही वरिष्ठ पत्रकार केशव भट्ट से यात्रा के अनुभव साझा किए। बताया कि वे 47 साल पहले 1974 में राजस्थान से पढ़ाई कर रहे थे। उस समय भी पिंडारी ग्लेशियर की यात्रा के लिए आए थे। तब भी यात्रा पूरी नहीं कर पाए। इस बार अपने बेटे देवेश्वर और ध्रुव शर्मा के साथ यात्रा पर आए। इस बार भी उनकी हसरत पूरी नहीं हुई। कहा कि वे फिर पिंडारी की यात्रा पर आएंगे।
खातीगांव में आदर सत्कार से अभिभूत थे शर्मा
बागेश्वर। भारतीय क्रिकेट कमेंटेटर चारु शर्मा ने बताया कि खातीगांव में लोगों ने उनका बहुत आदर सत्कार किया। स्वादिष्ट खाना खिलाया। उन्होंने कहा कि पहाड़ के लोगों का व्यवहार काफी अच्छा लगा। यहां के लोग आज भी काफी सहज और सरल हैं। बताया कि यात्रा के दौरान स्थानीय गाइड प्रकाश दानू और उनके मित्र सुमित गोयल ने उनकी काफी मदद की। जिला प्रशासन से भी उन्हें काफी मदद मिली।