बागेश्वर के खाती गांव के अस्पताल में भर्ती मरीज। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। खाती के अस्पताल में रिक्त पदों को भरने की कवायद शुरू हो गई है। हंस फाउंडेशन की ओर से संचालित अस्पताल में एएनएम के दोनों रिक्त पदों पर तैनाती हो गई है। दवाओं का पर्याप्त स्टॉक पहुंच गया है। फाउंडेशन की ओर से संचालित धूर और बदियाकोट के सब सेंटरों में भी कामकाज सुचारु हो गया है। 15 जून तक अस्पताल में लैब तकनीशियन की तैनाती हो जाएगी। एमबीबीएस चिकित्सक की नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। अस्पताल में तैनात आयुष चिकित्सक की मदद से मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
हंस फाउंडेशन ने वर्ष 2016 में खाती गांव में स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की थी। अस्पताल में एक एलोपैथिक, एक आयुष डॉक्टर तैनात था। अन्य स्टाफ में पांच एएनएम, दो जेएनएम, एक फार्मासिस्ट, एक लैब तकनीशियन, एक वॉर्ड ब्वॉय और एक वार्ड गर्ल की तैनाती की गई है। अस्पताल का संचालन हंस की सहयोगी संस्था करुणा ट्रस्ट कर रहा था लेेकिन विगत 31 मार्च को करुणा ट्रस्ट ने हाथ खींच लिया।
इसी दौरान एमबीबीएस चिकित्सक, दो एएनएम ने भी काम छोड़ दिया। अप्रैल से अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी हंस फाउंडेशन ने अपने हाथ में ली और रिक्त पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जिसके तहत दो एएनएम तैनात किए गए। वहीं अस्पताल में दवाओं का पर्याप्त स्टॉक मंगाया गया। हालांकि अब भी एमबीबीएस चिकित्सक, लैब तकनीशियन और एक जेएनएम का पद रिक्त चल रहा है।
हंस फाउंडेशन के कंसलटेंट एनबी अवस्थी ने बताया कि स्टाफ की कमी से धूर और बदियाकोट के सब सेंटरों के संचालन में भी दिक्क्कत हो रही थी। अब बदियाकोट और धूर में दो-दो एएनएम तैनात कर दिए गए हैं। दोनों सेंटरों को सुचारु रूप से संचालित किया जा रहा है। खाती अस्पताल में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। इसी महीने लैब तकनीशियन अपना कार्यभार ग्रहण कर लेंगे। एमबीबीएस चिकित्सक और जेएनएम की नियुक्ति प्रक्रिया भी जारी है। महीने के अंत तक डॉक्टर और जेएनएम भी तैनात हो जाएंगे। फिलहाल अस्पताल के आयुष चिकित्सक मरीजों का इलाज कर रहे हैं। हिमालयी क्षेत्र से सटे गांवों के लोगों को अस्पताल से हरसंभव सुविधा प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है।