फाइलों में सिमटीं ढाई हजार से अधिक मुख्यमंत्री घोषणाओं के पूरा नहीं होने का ठीकरा कांग्रेस भाजपा पर फोड़ने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस यह साबित करने में जुट गई है कि अगर उत्तराखंड में भाजपा सियासी संकट पैदा न करती तो ये विकास योजनाएं धरातल पर भी नजर आतीं। इन्हीं घोषणाओं को लेकर भाजपा मुख्यमंत्री हरीश रावत को कटघरे में खड़ा करती रही है। मुख्यमंत्री की ये घोषणाएं प्रदेश शासन का भी सिरदर्द रही हैं। अब इन्हीं घोषणाओं को लेकर कांग्रेस और भाजपा चुनावी रणनीति का तानाबाना बुन रही हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की इन घोषणाओं को पूरा करने के लिए प्रदेश शासन पैसा नहीं होने का रोना रोता रहा है। विधानसभा सदन से लेकर सड़क तक के कार्यक्रमों में पूर्व मुख्यमंत्री केंद्र के पैसा न देने का शिकवा करते रहे हैं।
इन घोषणाओं को लेकर विधानसभा सदन में नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और मुख्य सचेतक मदन कौशिक ने मुख्यमंत्री की खिल्ली उड़ाई थी। पूर्व मुख्यमंत्री रावत और प्रदेश शासन में इन घोषणाओं से लेकर यह बेचैनी थी कि अगर इन्हें पूरा न किया जा सका तो जनता को क्या जवाब देंगे?
घोषणाओं के साइड इफैक्ट्स से खुद को बचाने के लिए कांग्रेस सरकार ने इनकी संख्या न्यूनतम पर लाकर अलग-अलग विभागों से शासनादेश जारी करवाने शुरू कर दिए थे। शासन के अफसरों ने हाथ खड़े कर लिए थे कि सारी घोषणाएं पूरा करने के लिए पैसा ही नहीं है।
सीएम घोषणाओं को भाजपा कांग्रेस पर हमले के लिए कारगर हथियार समझ रही थी, लेकिन सियासी संकट ने इन सीएम घोषणाओं की रणनीति को उलट-पुलट दिया है। भाजपा को सरकार की बर्खास्तगी का दोषी बताकर कांग्रेस अब घोषणाओं के पूरा न हो पाने के सच पर आवरण डाल सकेगी। इसके लिए दोनों दलों के रणनीतिकारों ने बिसात बिछानी शुरू कर दी है।