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भालू डैम क्षेत्र में पर्यटन विकास की हैं अपार संभावनाएं

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रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन नए पर्यटन स्थलों का विकास तो दूर अंग्रेजों द्वारा स्थापित किए स्थल भी वर्तमान में बिसरा दिए गए हैं।
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वर्ष 1903 में अंग्रेज हुक्मरानों ने चौबटिया की तलहटी पर भालू डैम की स्थापना की थी, वहां वह नौकायन करते थे, भाप के माध्यम से संचालित पेयजल योजनाओं का निर्माण किया गया था।
इस डैम को नैनीताल झील की तर्ज पर विकसित करने की मांग वर्षों से चल रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है, जबकि यहां सफारी, फोटोग्राफी और ट्रैकिंग रूट विकसित किए जाने की भी अपार संभावनाएं हैं।
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भालू डैम एक कृत्रिम झील है। 1903 में ब्रिटिश शासकों ने इसे डैम के रूप में विकसित किया। चौबटिया और रानीखेत को तब यहीं से पानी की आपूर्ति होती थी। बांज, बुरांश और देवदार के घने जंगलों के बीच स्थापित इस डैम में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। हालांकि चौबटिया के लिए अब भी यहीं से पानी की आपूर्ति की जाती है।
इसे आज तक धरोहर के रूप में तक नहीं सहेजा गया। यहां की खूबसूरती देखते ही बनती है। यह डैम पर्यटकों की पसंद भी रहा है। पूर्व में चौबटिया से भालू डैम तक रोपवे की मांग भी उठी थी। पथ भ्रमण के शौकीनों के लिए तीन किमी का ट्रैकिंग रूट निर्माण की मांग भी थी। बताते हैं कि 1903 में ब्रिटिश वाइसराय द्वारा निर्मित दुर्लभ अर्ध-गोलाकार डैम का निर्माण किया गया था।
इस लघु झील में मत्स्य आखेट और फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकती है। भालू डैम में लगभग 500 मीटर लंबा और लगभग 50 मीटर चौड़ा देव वृक्ष देवदार का जंगल भी है जिसे देववनी के नाम से जाना जाता है।
तब अंग्रेजों ने इसे पिकनिक स्थल के रूप में विकसित किया था। केएमवीएन के पूर्व निदेशक डीएन बडोला कहते हैं कि 2015 में कांग्रेस सरकार को भी उन्होंने इसे विकसित करने के लिए ज्ञापन दिए। केएमवीएन भी इसके विकास के लिए प्रतिबद्ध था।
ऐसे पहुंचें भालू डैम
रानीखेत से भालू डैम पहुंचने के लिए पहले रानीखेत से 10 किमी दूर चौबटिया गार्डन, फिर गार्डन से तीन किमी तलहटी में पैदल भालू डैम स्थित है। घने जंगल के बीच होकर यहां गुजरना पड़ता है। रास्ते भर में देवदार, चीड़, बुरांश, बांज आदि का सदाबहार घने वनाच्छादित जंगल हैं। झील की लंबाई 70 मीटर, चौड़ाई 6.6 मीटर और गहराई लगभग नौ मीटर बताई जाती है।
छावनी परिषद का कहना है कि भालू डैम के आस पास के क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। यह पर्यटन की दृष्टि से बेहद मुफीद हो सकता है। जैसे ही प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, इसके विकास के प्रयास किए जाएंगे।
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