जैंती (अल्मोड़ा)। एक तरफ देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है वहीं दूसरी तरफ सालम के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम सिंह धौनी का पैतृक गांव तल्ला बिनौला बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। तहसील मुख्यालय और गांव में आजादी के 74 सालों बाद भी धौनी की प्रतिमा तक नहीं लगी है। गांव में उनके नाम पर सिर्फ जन मिलन केंद्र बना है। गांव के पैदल रास्ते कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हैं।
राम सिंह धौनी का जन्म 24 फरवरी 1893 में जैंती तहसील क्षेत्र के तल्ला बिनौला गांव में कुंती देवी और हिम्मत सिंह धौनी के घर में हुआ था। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के राम सिंह ने बीए तक की पढ़ाई प्रथम श्रेणी में पास की। तब धौनी सालम क्षेत्र से स्नातक उपाधि पाने वाले पहले व्यक्ति थे। उन्होंने कुमाऊं कमिश्नर के तहसीलदार पद की सरकारी नौकरी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और पूरा जीवन देश सेवा में लगा दिया।
धौनी अल्मोड़ा डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के सदस्य और 1926 में चेयरमैन भी रहे। 1928 में वह सालम आ गए और चौखुरी में मिडिल स्कूल स्थापित कर लोगों में आजादी की अलख जगाई। धौनी का पैतृक गांव तमाम दिक्कतों से जूझ रहा है। तहसील मुख्यालय और पैतृक गांव तल्ला बिनौला में अब तक धौनी की प्रतिमा नहीं लग सही है। गांव के पैदल रास्ते कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है।
गांव की 50 प्रतिशत से अधिक कृषि भूमि भूस्खलन में जमींदोज हो चुकी है। गांव का प्राथमिक स्कूल क्षतिग्रस्त है। ग्रामीणों ने राम सिंह धौनी के नाम पर तहसील मुख्यालय में स्टेडियम बनाने, गांव और तहसील मुख्यालय में उनकी प्रतिमा लगाने, क्षतिग्रस्त विद्यालय भवन की मरम्मत करने की मांग की।
राम सिंह धौनी ने देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया लेकिन आज सरकारों ने इस महान क्रांतिकारी को भूला दिया। उनके नाम पर जैंती में एक संग्रहालय बनाया जाना चाहिए। ताकि आने वाली पीढ़ी उनके कार्यों से रूबरू हो सके।
- राजेंद्र सिंह धौनी, राम सिंह धौनी के प्रपौत्र
राम सिंह धौनी के गांव तत्ला बिनौला की अब तक की सरकारों ने उपेक्षा की है जबकि उन्होंने सबकुछ देश पर कुर्बान कर दिया। गांव में उनकी आदमकद प्रतिमा जल्द लगायी जानी चाहिए। साथ ही अन्य समस्याओं का भी समाधान किया जाए।
- धर्मेंद्र सिंह बिष्ट, तल्ला बिनौला