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काकड़ीघाट में झील निर्माण का मामला शासन के ठंडे बस्ते में

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Proposed Lake in Kakadighat
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अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री की घोषणा के चार वर्ष बाद भी कोसी नदी में काकड़ीघाट में बैराज का निर्माण नहीं हो पाया है जबकि विशेषज्ञों ने इस स्थान को बैराज (झील) निर्माण के लिए फिजिबिलिटी परीक्षण में उपयुक्त पाया है। सिंचाई विभाग की ओर से शासन को भेजे गए आगणन को मंजूरी नहीं मिल सकी है। इससे काकड़ीघाट में झील निर्माण का मामला अधर में लटक गया है।
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अल्मोड़ा-भवाली राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे काकड़ीघाट में मंदिर है। यह स्थान स्वामी विवेकानंद की तपस्थली भी रहा है। चार साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोसी नदी में काकड़ीघाट में झील निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद सिंचाई विभाग ने काकड़ीघाट में झील निर्माण के लिए फिजिबिलिटी परीक्षण कराया। काकड़ीघाट मंदिर से करीब आठ सौ मीटर पहले भवाली की ओर झील निर्माण के लिए स्थान को विशेषज्ञों ने उपयुक्त को पाया है।
इस स्थान पर करीब छह से आठ मीटर ऊंचे बैराज का निर्माण प्रस्तावित है। इसमें पानी भरने के बाद करीब तीन किमी लंबी झील बनेगी। जिसकी क्षमता छह लाख घन मीटर होगी। झील बनने के बाद इस स्थान के धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से विकसित होने की अच्छी संभावना है। साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यही नहीं बैराज में पानी भरने से आसपास के इलाकों के लिए पंपिंग योजनाओं का भी निर्माण किया जा सकता है।
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शासन को प्री फिजिबिलिटी रिपोर्ट (पीएफआर) तैयार कर डीपीआर बनाने के लिए अगस्त 2019 में 81 लाख रुपये प्रस्ताव भेजा गया था। जिसके बाद शासन ने संशोधित आगणन भेजने के निर्देश दिए थे। अप्रैल 2021 में 32 लाख का संशोधित आगणन भेजा गया। साथ ही विभागीय मद से भी बैराज में धनराशि खर्च की जानी है, लेकिन अब तक शासन से बजट अवमक्त नहीं हुआ है।
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प्रमोद कुमार पाठक, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग अल्मोड़ा।
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