रानीखेत (अल्मोड़ा)। चिलियानौला के नाम से जुड़े तीनों प्राचीन नौले अब पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। हालांकि इस क्षेत्र में कुछ प्राचीन धारे भी हैं, जिनमें से कई लोग पानी पीते हैं। शिव मंदिर परिसर और नगर पालिका कार्यालय के ठीक नीचे वर्ष 1920 से 1926 के बीच इन नौलों का निर्माण हुआ था। बताते हैं कि निर्माणकर्ताओं ने अपनी अपनी बेटियों के नाम पर नौलों की स्थापना की थी, इसीलिए क्षेत्र का चेलीनौला पड़ा धीरे धीरे नाम बिगड़कर चिलियानौला हो गया। बाद में संरक्षण के अभाव में तीनों नौले पूरी तरह से बंद हो गए हैं। इनके संरक्षण के लिए वर्तमान में कोई नीति किसी के पास नहीं है। पालिका का कहना है कि जल संचय योजना में इस मसले को बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा।
चिलियानौला नगर पालिका पूर्व में बधांण ग्रामसभा का हिस्सा थी। बताते हैं कि मुख्य बाजार में वर्ष 1915 के आसपास सिर्फ एक धर्मशाला थी और आसपास घने बांज के जंगल थे। भिकियासैंण, सल्ट जैसे दुर्गम क्षेत्रों से लगान वसूलकर लाने वाले थोकदार इस धर्मशाला में रात्रि विश्राम करते थे। तल्ला बधांण गांव निवासी रवींद्र चंद्र जोशी बताते हैं कि बांज के जंगल होने के कारण पानी की अधिकता थी तो वर्ष 1920 के दौरान सभी के सहयोग से इन स्रोतों को नौले के रूप में तब्दील किया गया। तब कोई भी पानी की स्कीम नहीं थी तो पूरी चिलियानौला इन्हीं नौलों पर निर्भर थी। पूर्व प्रधान कवींद्र कुवार्बी कहते हैं कि 1973 में ताड़ीखेत पेयजल स्कीम बनने के साथ ही यहां आबादी का विस्तार होने लगा। शौचालयों का पानी भी रिसकर नौलों में पहुंचने लगा। इस कारण लोगों ने पानी का इस्तेमाल करना बंद कर दिया। धीरे-धीरे नौले सूखते गए। वरिष्ठ व्यवसायी विपिन चंद्र शर्मा ने बताया कि योजना बनने के बाद भी लोग गर्मियों में इन्हीं नौलों से पानी पीते थे। लेकिन लंबे समय से नौले बंद पड़े हैं।
पालिका के पास पानी संचय योजना है, जिसमें नौले, धारे और पाइप लाइनों के संरक्षण का काम होता है। हम भी चाह रहे हैं कि प्राचीन नौलों, धारों का संरक्षण होगा। इस मसले को बोर्ड की बैठक में पास कराएंगे और इसके बाद ही सार्थक कार्रवाई हो पाएगी। - जगदीश चंद्र, ईओ, नगर पालिका चिलियानौला रानीखेत।
फिलहाल जल संस्थान के पास इन प्राचीन नौलों के संरक्षण के लिए कोई योजना नहीं है। जल जीवन मिशन आने वाले समय में नगरीय क्षेत्र के लिए भी लागू होगा। इसके बाद ही इनके सुधारीकरण और सौंदर्यीकरण की बात होगी। -सुरेश ठाकुर, ईई, जल संस्थान, चिलियानौला रानीखेत।
गंदगी से दूषित हो रहे शहर, गांव के प्राकृतिक नौले
अल्मोड़ा। गर्मी के मौसम में हर साल जिले में लोगों को पेयजल की किल्लत झेलनी पड़ती है। पेयजल के लिए लोग यहां प्राकृतिक नौलों पर भी निर्भर रहते हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पानी के लिए कई नौले हैं जिनसे लोग पानी भरते हैं, लेकिन वर्तमान में उपेक्षा के कारण कई नौले सूख चुके हैं तो कई नौले गंदगी से दूषित हो रहे हैं। नौलों के पास कूड़े के ढेर लगे है जिससे वहां पहुंचकर जानवर भी नौले के पानी को दूषित कर रहे हैं। नगर में मालरोड और गुरूरानी खोला का हाल भी बदहाल है। इन दोनों नालों के पास काफी मात्रा में कूड़ा जमा है लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे पानी दूषित होने के साथ ही नौलों के सूखने की भी संभावना है।