डा. प्रमोद नैनवाल
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। कुमाऊंनी में एक बात प्रचलित है कि जैक भाग बाटम् लाग रूं वीक सब ठीक हूं। यह बात भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रमोद नैनवाल के लिए सच साबित हुई। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने के कारण उन्हें दो बाद भाजपा से निष्कासित किया गया। इसके बावजूद वह पार्टी में आए और टिकट पाकर विधायक बनने में कामयाब हो गए।
2017 में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी अजय भट्ट के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले नैनवाल को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में से ऐन वक्त पहले उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया गया। इसी बीच पंचायत चुनाव में बेतालघाट से उन्होंने अपनी बहन को मैदान में उतार दिया। इसके बाद नैनवाल को फिर निष्कासित कर दिया गया। 2021 में हुए सल्ट उपचुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ रावत ने उन्हें भाजपा में शामिल कराया। हालांकि भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि वह पार्टी का हिस्सा नहीं हैं, तमाम बैठकों में उनका विरोध होने लगा। अंत में भाजपा नेतृत्व ने उन्हें प्रत्याशी बना दिया।
कांग्रेस को ले डूबा अति आत्मविश्वास
रानीखेत। रानीखेत सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है लेकिन इस बार कांग्रेस इस सीट पर अति आत्मविश्वास के कारण हार गई। मतदान के बाद ही कांग्रेसी कम हार जीत वाली इसी सीट पर आठ से 10 हजार की जीत का दंभ भर रहे थे। भाजपा के लोग अपनी जीत दो से ढाई हजार की मान रहे थे।
भाजपाइयों ने रानीखेत में निकाला जुलूस
रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी प्रमोद नैनवाल की जीत के बाद समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने बाजार में विजय जुलूस निकाला और जमकर जश्न मनाया। अल्मोड़ा में जीत घोषित होते हुए डॉ. प्रमोद नैनवाल समर्थकों ने रानीखेत पहुंचे और जुलूस में शामिल हुए।