बच्चे नहीं होने से स्कूल हुआ बंद
दोबाड़ से शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क सुविधाओं की तलाश में बढ़ते पलायन का असर गांव के जूनियर हाईस्कूल पर भी पड़ा। छात्र संख्या कम होने के कारण वर्ष 2014-15 में विद्यालय में ताला लग चुका है।
सर्वे तक सिमट रही कवायद
दोबाड़ के ग्रामीणों ने बताया कि सड़क के लिए तीन बार सर्वे होने के बाद वन विभाग ने पेड़ों में निशान तक लगा दिए थे। उसके बाद से सड़क निर्माण का कार्य अधर में लटका है।
बोले ग्रामीण-
सड़क, शिक्षा, संचार नहीं होने की सबसे बड़ी कीमत गांव के बुजुर्गों को चुकानी पड़ रही है। युवा वर्ग रोजगार और बेहतर सुविधाओं की चाहत में पलायन कर चुका है। गांव में केवल बुजुर्ग बचे हैं। जिनको समय-समय पर परेशानी उठानी पड़ती है।
-स्वरूप सिंह, बुजुर्ग ग्रामीण, दोबाड़कोट
शहीद के गांव को शासन से पांच किमी सड़क स्वीकृत होने के बाद निर्माण की प्रक्रिया न पूरी होना और सड़क कटान शुरू नहीं होना सोचनीय विषय है। इस मामले में शासन-प्रशासन को गंभीरता से सोचना चाहिए।
-रणजीत सिंह, शहीद मोहन सिंह के चाचा
गर्भावस्था के दौरान होनेे वाली जांच के लिए अस्पताल जाने में गांव से सड़क तक पैदल जाना पड़ता है। रास्ता उबड़-खाबड़ होने से हर समय डर लगा रहता है।
हेमा देवी, गर्भवती, दोबाड़कोट
गांव में बुनियादी सुधाएं नहीं होने से अधिकांश युवा रोजगार के लिए शहर चले गए हैं। गांव में संचार सुविधा नहीं होने से उनकी बुजुर्ग माता-पिता और परिजनों से बातचीत नहीं हो पाती है। फोन पर बात करने के लिए भी पांच-छह किमी दूर जाना पड़ता है।
-नीरज देव, ग्रामीण युवा, दोबाड़
शहीद मोहन सिंह के गांव तक सड़क निर्माण के कार्य में तेजी से प्रगति हो रही है। गांव को संचार सुविधा से जोड़ने के लिए बघर में मोबाइल टावर का निर्माण चल रहा है। पास ही एक दूसरा टावर भी बनाया जा रहा है। गांव की मूलभूत समस्याओं के जल्द निदान के लिए कार्य किया जा रहा है।
-सुरेश गढ़िया, विधायक कपकोट