अल्मोड़ा/बागेश्वर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर शनिवार को जिले में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। दोनों ही जिलों में आयोजित लोक अदालतों में कुल 315 वादों का निपटारा किया गया। अल्मोड़ा में जहां पांच बेंचों की अदालत में 234 वाद निस्तारित किए गए, वहीं बागेश्वर में 81 वाद निपटाए गए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव रविशंकर मिश्रा ने बताया कि लोक अदालत में मामलों के निस्तारण के लिए जिले में चार बेंच और वाह्य न्यायालय के लिए एक बेंच बनाई गई। जिला न्यायालय में जिला एवं सत्र न्यायाधीश की बेंच संख्या एक के समक्ष नौ मामले और उपभोक्ता प्रतितोष फोरम के 34 समेत कुल 43 वाद निस्तारण के लिए रखे गए। बेंच ने जिला एवं सत्र न्यायालय के एमएसीटी के एक वाद का निस्तारण कर राशि पक्षकार को दिलाई।
अन्य दो दीवानी वादों का निस्तारण कर सुलह समझौता किया गया। उपभोक्ता प्रतितोष के 22 वादों का निस्तारण किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की गठित बेंच ने कुल 25 वादों का निस्तारण किया। परिवार न्यायाधीश की गठित बेंच संख्या दो के समक्ष 23 वैवाहिक वाद निस्तारण के लिए रखे गए। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की बेंच संख्या तीन के समक्ष 40 वाद और बैंक से संबंधित प्री-लिटिगेशन मामलों में कुल 25 वादों का निस्तारण किया गया।
बैंक के प्री-लिटिगेशन वादों से संबंधित 126 वादों का निस्तारण किया गया। सिविल जज की गठित बेंच संख्या चार के समक्ष 44 वाद रखे गए, 24 वादों का निस्तारण कर सुलह समझौते के आधार पर राशि दिलाई गई। वाह्य न्यायालयों में निस्तारण के लिए गठित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रानीखेत की बेंच संख्या पांच के समक्ष सिविल जज (जूडि) रानीखेत, सिविल जज (जूडि) द्वाराहाट आदि के वाद का भी निस्तारण किया गया।
लोक अदालत में कुल 108 लंबित वाद और 126 प्री-लिटिगेशन समेत कुल 234 वादों का निस्तारण किया गया जबकि प्री-लिटिगेशन मामलों में समझौता किया गया। उधर, जिला न्यायालय बागेश्वर में जिला जज/अध्यक्ष जिला विकास प्राधिकरण एसएमडी दानिश की बेंच संख्या 1 में एक एमएसीटी वाद में सुलह समझौता हुआ। इसमें 6.75 लाख रुपये का समझौता कराया गया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजू मुंडे की बेंच संख्या 2 में 138 एनआई एक्ट, श्रम वाद, वैवाहिक, धन वसूली वाद अन्य सिविल केस कुल 61 वादों में सुलह समझौता किया गया। इन मामलों में 35 लाख 86 हजार 442 रुपये का समझौता हुआ। इसके अलावा बैंक मामलों के प्री लिटिगेशन के 19 मामलों में पांच लाख 33 हजार आठ रुपये का समझौता कराया गया।