फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूक्रेन में चार दिन बंकर में छिपकर बचाई जान: लिपि

विज्ञापन
अल्मोड़ा में यूक्रेन से लौटी लिपिका का स्वागत करते माता- पिता। - फोटो : ALMORA
विज्ञापन
अल्मोड़ा। यूक्रेन से बुधवार शाम अल्मोड़ा स्थित अपने घर पहुंची लिपिका चौहान को देखकर परिवार के लोग काफी खुश नजर आए। लिपिका की मां मुन्नी चौहान ने बेटी का टीका चंदन और फूल माला से स्वागत किया। पिता मदन सिंह चौहान बेटी को लेने के लिए सड़क पर पहुंचे थे। बेटी के सकुशल घर पहुंचते ही जश्न का माहौल था। परिवार के लोग आपस में लोगों को मिठाई खिलाकर खुशी जता रहे थे।
विज्ञापन

यूक्रेन में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही लिपिका चौहान ने बताया कि वह रोमानिया से 1600 किमी दूर डेनिप्रो शहर में रहकर पढ़ाई कर रही थी। उसके साथ हॉस्टल में करीब 15 साथी थे। अब सभी अपने घर लौट आए हैं। उन्हें डेनिप्रो से रोमानिया पहुंचने में 27 घंटे लगे। एक मार्च को डेनिप्रो से चलकर दो मार्च को दोपहर ढाई बजे रोमानिया पहुंची। वहां काफी बर्फ पड़ रही थी। बर्फ में तीन घंटे खड़े रहकर चेकिंग में अपनी बारी का इंतजार किया। उन्होंने बताया कि चार दिन तक उन्होंन अपने साथियों के साथ बंकर में छिपकर जान बचाई थी। इस दौरान खाने-पीने की चीजें खत्म हो गई थी। चार दिन तक रोजाना तीन पीस ब्रेड के खाकर दिन काटे। रोमानिया पहुंचने के बाद भारत सरकार ने पूरी मदद की। लिपिका के दो बड़े भाई हैं। पिता सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद अब बैंक में नौकरी कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें