अल्मोड़ा। जिला मुख्यालय स्थित केमू स्टेशन से विभिन्न स्थानों को बसें संचालित होती हैं लेकिन यहां सुविधाओं की कमी है। यात्रियों के विश्राम के लिए अच्छा फर्नीचर तक नहीं है। शौचालय तो है लेकिन सफाई व्यवस्था लचर होने से शौचालय गंदा रहता है। इससे यात्रियों में नाराजगी है। यात्रियों ने कहा कि शौचालय के प्रयोग करने पर वह दस रुपये शुल्क देते हैं लेकिन शौचालय गंदा मिलता है। स्टेशन में यात्रियों के लिए पेयजल व्यवस्था के इंतजाम किए जाने चाहिए।
अल्मोड़ा स्थित केमू स्टेशन से रोजाना मुख्य तौर पर हल्द्वानी, नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, रानीखेत, चौखुटिया, गंगोलीहाट, द्वाराहाट, शीतलाखेत, भनोली, रामनगर, द्वाराहाट समेत कई रूटों पर बसों का संचालन होता है। यहां न तो स्टेशन के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है और न ही यहां बसों के रिपेयर के लिए वर्कशॉप है। कई सालों बाद भी स्टेशन में सुविधाओं की कमी बनी है। स्टेशन में यात्रियों के विश्राम के लिए पर्याप्त मात्रा में फर्नीचर तक नहीं है। जो है भी वह काफी पुराना है। परिसर में कई स्थानों पर गुटका खाकर थूका गया है। शौचालय होने के बाद भी कुछ लोग खुले स्थान पर शौच कर देते हैं। यात्रियों का कहना है कि दस रुपये शुल्क चुकाकर वह शौचालय का प्रयोग करते हैं इसके बावजूद शौचालय गंदा रहता है। उन्होंने कहा कि शौचालय में सफाई व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। यात्रियों के लिए बैठने के लिए पर्याप्त और अच्छी कुर्सियां होनी चाहिए।
केमू स्टेशन भवन की हालत जर्जर
अल्मोड़ा। 1939 में कुमाऊं मंडल में केमू की शुरूआत हुई। तब हल्द्वानी के काठगोदाम में केमू मुख्यालय बना था। 1952 में अल्मोड़ा में भी केमू बसों का संचालन शुरू हो गया था। शुरूआत में केमू स्टेशन शिखर तिराहे पर किराये के भवन में संचालित हुआ। इसके बाद स्टेशन माल रोड में किराये के भवन में शिफ्ट हुआ। 2007 में यह भवन केमू के नाम पर हो गया। स्टेशन जर्जर हालत में है। शुरू में कुमाऊं में सिर्फ नौ बसों से केमू का संचालन प्रारंभ हुआ और आज पूरे कुमाऊं में केमू की 400 से अधिक बसें चलती हैं।
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केमू स्टेशन स्थित शौचालय में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। दस रुपये शुल्क देने के बाद भी जब यात्री शौचालय जाता है तो उसे वहां गंदगी का सामना करना पड़ता है। इससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। - हेमा गोस्वामी, यात्री।
केमू स्टेशन के आसपास अधिकतर स्थानों पर लोगों ने थूका है। इससे यात्रियों के बैठने में दिक्कतें होती हैं। यात्रियों के विश्राम के लिए अच्छी सुविधा नहीं है। हालत में सुधार करने की जरूरत है। - अजय कुमार, यात्री।
केमू स्टेशन परिसर में जहां पर भी गुटका खाकर थूका गया है उसकी सफाई की जानी चाहिए ताकि यात्रियों को दिक्कत न हो। जर्जर भवन की मरम्मत हो ताकि हादसा होनेे से बचा जा सके। - बालकिशन, यात्री।
कोरोना के चलते लाकडाउन, कोविड़ कर्फ्यू के दौरान बसों का संचालन बंद रहा। इससे केमू प्रबंधन की आय पर भारी असर पड़ा। बजट उपलब्ध होने पर केमू स्टेशन भवन की मरम्मत की जाएगी। स्टेशन में यात्रियों के विश्राम को सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्हें किसी भी तरह की दिक्कतें नहीं होने दी जाती हैं। - हिम्मत सिंह नयाल, अधिशासी निदेशक केमू।